बाँदा की घरार नदी व श्रमदानियों को लेकर जल लशक्ति मंत्रालय और ग्राम विकास विभाग आमने-सामने

श्रमदानियों को मार मारकर सती बना रहा है ग्राम विकास विभाग
गंगा की कसम खा रहे हैं श्रमदानी कि हमने मनरेगा में काम नहीं किया
श्रमदानी मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ जाएंगे
श्रमदानी बोले कि मनरेगा का जो फर्जी काम दिखा रहे हैं वही खाएं पैसा, हमे बेईमानी का पईसा न चाही साहब
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
भांवरपुर(बाँदा): बाँदा की घरार नदी पर काम करने वाले श्रमदानियों के मामले को लेकर जलशक्ति मंत्रालय और ग्राम विकास विभाग आमने-सामने आ गए हैं।
मालूम हो कि बीती 08 जून 2020 से एक दशक से सूखी पड़ी बाँदा जिले की नरैनी तहसील की ग्राम पंचायत बिल्हरका के ग्राम भांवरपुर मे लॉक डाउन दो और तीन के दौरान महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, दिल्ली से अपने गांव लौटे 52 प्रवासी मजदूरों ने सूखी पड़ी घरार नदी पर श्रमदान शुरू किया था। उन्होंने सोचा था कि जब नदी मे फिर से पानी आ जायेगा तो वे फिर रोजी रोटी के लिये पलायन कर परदेश नहीं जाएंगे। उनका अथक परिश्रम रंग लाया और 06 दिन बाद 14 जून को जैसे घरार नदी से बेशरम, कटीले झाड़, खर पतवार हटाकर जैसे दो दिनों तक इन प्रवासी मजदूरों ने नदी को तीन फुट गहरा खोदकर मलबा हटाया तो जलस्त्रोतों से जल धारा फूट पड़ी। ये देख मजदूर महिलाएं, पुरुष खुशी से नाचने लगे। नदी में पानी आने की बात सुनकर भांवरपुर गांव के सभी बूढ़े, बच्चे, महिलाएं दौड़ते हुए नदी तट पर आ गए। उसी में नाचने लगे और देवी देवताओं के जयकारे लगाने लगे। ये खबर जब आसपास के गांव में पहुंची तो बुंदेली परंपरा के अनुसार आधा दर्जन गांव से ग्रामीण आटा, दाल, सब्जी लेकर नदी के तट के पास आ गए। कुछ कीर्तन मंडलियां भी आ गईं और नाच गाकर श्रमदानियों का हौसला बढ़ाने लगे। ग्रामीण महिलाएं लोक गीत गाते हुए सभी श्रमदानियों के लिए सामूहिक रसोई बनाने लगीं। इसी बीच जैसे ही नदी मे पानी आने की बात चली तो बीडीओ मनोज कुमार, ग्राम प्रधान राम नरेश सिंह के साथ घरार नदी के तट पर आये और उन्होंने श्रमदानियों से कहा कि हम आपके काम को मनरेगा में ले लेंगे। और आप लोगों को चार-पांच दिन का मनरेगा से 201रु प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान दिलवा देंगे। इस पर श्रमदानी बोले साहब हमे बेईमानी का पईसा न चाही, हमने अपनी घरार नदी म श्रमदान किया है। नदी म पानी आगा यह हमाये लाने खुशी की बात है। इसी बीच पुनर्जीवित घरार नदी पर श्रमदान कर रहे प्रवासी मजदूरों का वीडियो और फोटो केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत 17 जून 2020 को भेज दिया गया। उन्होंने वह वीडियो और फोटो जलशक्ति मंत्रालय में प्रसारित करने के साथ-साथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया। इसके बाद 18 जून को योगी आदित्यनाथ ने अवर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से मंत्रणा कर इन सभी श्रमदानी प्रवासी मजदूरों को भागीरथ के रूप में सम्मान करने की घोषणा की। यह खबर लखनऊ से जैसे ही बाँदा जिले मे आयी तो बाँदा के ग्राम विकास विभाग में हड़कंप मच गया। इसी दिन शाम चार बजे बीडीओ मनोज कुमार ने ग्राम प्रधान राम नरेश सिंह के साथ घरार नदी के तट पर जबरियां मनरेगा का बोर्ड लगा दिया। इसमे घरार नदी को नाला बताते हुए उसमे मनरेगा से काम होना बताया गया। इसका अनुमानित बजट वर्ष 2020-21 के लिए 78 हजार 473रु बताया गया है। लेकिन हैरतअंगेज बात ये है कि इसमें कार्य के प्रारंभ और कार्य के समाप्ति की कोई तिथि नहीं दी गयी है। 19 जून को लखनऊ से मुख्य अभियंता के नेतृत्व में एक जांच दल घरार नदी पहुंचा। जिसमे मुख्य अभियंता लखनऊ के अलावा सीडीओ बाँदा हरिश्चंद्र वर्मा, बीडीओ नरैनी मनोज कुमार, ग्राम प्रधान राम नरेश सिंह अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे। जब बीडीओ ने मुख्य अभियंता को बताया इस नाले पर मनरेगा से काम पहले से चल रहा है। जिसपर आक्रोशित श्रमदानियों ने कि हमारे बुजुर्गों के जमाने से यह घरार नदी है नाला नहीं है। इस पर मुख्य अभियंता ने सीडीओ से कहा इसे नाला नहीं नदी ही दर्ज करिए। इसके बाद 20 जून तारीख को बीडीओ और ग्राम प्रधान फिर आये और हम श्रमदानी प्रवासी मजदूरों से जबरियां मनरेगा में काम करने को कहने लगे। जब हमने मना किया तो हम लोगों को धमकाने लगे और बोले ये सारा काम मनरेगा से ही हुआ है। तुम सब श्रमदानियों के नाम मनरेगा के मस्टररोल में दर्ज हैं। इसपर मजदूर बोले हमे मार मारकर सती न करा साहब(बुंदेली की एक कहावत है कि अगर किसी का पति मर जाता है तब उसके घर वाले और आस पड़ोस के लोग उसका श्रृंगार करके सती कहते हुए जबरियां पति के शव के साथ चिता में बैठाकर जिंदा जला देते हैं और बाद में कहते हैं कि महिला सती हो गयी)। प्रवासी मजदूर बोले इसी तरह हमे भी मनरेगा के नाम पर जबरियां सती किया जा रहा है। बहराल जब श्रमदानी प्रवासी मजदूर किसी तरह भी मनरेगा में काम करने के लिए तैयार नहीं हुए तो मामला यहां तक बढ़ गया सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा ने मीडिया से यहां तक दिया कि वह काम मनरेगा का ही है। इसमें जो भी रोड़ा बनेगा उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी। जब यह बात जलशक्ति मंत्री गंजेन्द्र सिंह शेखावत को अपने मित्रों से मालूम हुई तो श्री शेखावत ने अपने मित्रों से कहा नदी पुनर्जीवन का एक बड़ा महत्व है। जलशक्ति मंत्रालय ऐसे श्रमदानियों का सम्मान करता है। जिन्होंने एक मरी हुई नदी को पुनर्जीवित किया है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। वे इस मामले में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता करके पूरी बात उन्हें बताएंगे। उधर श्रमदानी प्रवासी मजदूरों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी व्यथा बताने का निर्णय लिया है। फिलहाल ये श्रमदानी समाजसेवी राजा भैया के साथ आज भी नदी के तट पर धरने पर बैठे रहे।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
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