बाजारवाद ने कोरोना बीमारी का भी खोज लिया फैशन

ऑन लाइन खरीददारी में ड्रेस से मैचिंग करते मास्क भी उपलब्ध

पहला प्रयोग महिलाओं के फैशन पर , स्कूली बच्चे भी पहनेंगे मैचिंग मास्क

डॉ. राकेश द्विवेदी
उरई । कोरोना महामारी में व्याकुल हुए बाजारवाद ने एक नया फैशन खोज निकाला ! इस बार फैशन के तौर पर मास्क को खोजा गया है , जो हर किसी के लिए अनिवार्य भी है। यह पहना भी जाये और फबे भी , इस पर दिमाग लगाया गया है। अब तो कई नामीगिरामी स्कूल भी ड्रेस के अनुरूप मास्क तैयार कराने का आर्डर दे चुके हैं। इतना भर नहीं , शादी के दौरान पहने जाने वाली महिला ड्रेसें भी इसी के आधार पर तैयार होकर बाजार में उतर चुकी हैं ।
बाजार भी कितना सयाना है ! उसे अवसर की तलाश थी और वह मिल गई ! कोरोना में व्यापार की कमर टूटी तो उसी से कमर को सीधा करने की तरकीब भी खोज निकाली गई। खाली हाथ हुए फैशन डिजाइनर भी भला कहाँ चूकने वाले थे ? मौका मिलते ही लगे हाथ तरकीब खोज निकाली गई। विशेषज्ञों की रिपोर्टों के अध्ययन के बाद यह पता चला है कि अभी कम से कम दो वर्षों तक पूरी सतर्कता के साथ कोरोना के साथ आम जनजीवन को रहना पड़ेगा। इस बीमारी से बचाव के लिए मास्क जरूरी ही नहीं बल्कि अनिवार्य बना रहेगा। फिर क्या ? इसे फैशन का रुप देने में देर नहीं लगी। बाजार नियंताओं को मालूम है कि फैशन यदि जीवित है तो वह महिलाओं के दम पर ! इसीलिए बाजार का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं के फैशन को समर्पित है। सजने- संवरने के विविध उपाय और किस्में उनके लिए उपलब्ध हैं। हमेशा की तरह इस बार भी फैशन आजमाने का हथियार महिला वर्ग को ही बनाया गया। सलवार- सूट, जीन्स कुर्ती, और साड़ी का ऑर्डर करने पर उसी से मैचिंग करता हुआ मास्क भी बनवाये गए हैं। यह सुविधा ऑन लाइन खरीद पर अभी कुछ खास कम्पनियां ही कर रही हैं पर अब दूसरी कंपनियां भी इस विशेषता को अपनाने के लिए तैयारी कर चुकी हैं। बहुत जल्द आप पाएंगे कि हर कपड़े की दुकान पर मास्क सहित कपड़े उपलब्ध होंगे। चूंकि महिला वर्ग को रहन- सहन को लेकर ज्यादा संजीदा माना जाता है , इसलिए मास्क भी इन्हीं के लिए पहले तैयार हुए हैं। इसको महिलाएं भी हाथोंहाथ ले रही हैं । इसके बाद पुरुष वर्ग का नंबर होगा। जीन्स – टीशर्ट्स से मेल खाते मास्क बन रहे हैं। अर्थशास्त्र के नियमानुसार बाजारवाद मांग के अनुरूप फलता- फूलता है। मार्च से तो मांग घटने के कारण बाजार की हालत पतली हो चुकी है पर अब कोरोना बीमारी से तालमेल बैठाने वाले फैशन से आर्थिक स्थिति को सुधारने की कोशिश हुई है। मास्क पहनना अनिवार्य बना रहेगा अब यह तो तय है। इसीलिए ,क्यों न इसी के द्वारा कुछ राहत पाई जाए ? इसी की कोशिश हो रही है। शादी – समारोहों की पहली वाली रंगत तो अब बीते दिनों की बात हो चुकी है, और अभी यह जल्द लौटने भी नहीं जा रही है! इसके बावजूद फैशन डिजाइनर भला कहाँ मानने वाले हैं ? उन्होंने हुनर भरी अपनी चपलता दिखला ही दी ! ऐसे अवसरों के लिए वस्त्रों के जो डिजाइन तैयार किये हैं , उसी से मिलते मास्क भी डिजाइन किये गए हैं। मतलब मास्क लगाने में भी फैशन ! ऑन लाइन सूट मंगाने वाली कांशी कहती हैं कि हर किसी के पास इतने मास्क नहीं होते जी कपड़ों के अनुरूप पहन सके। इसलिए कंपनियों का ये प्रयोग अच्छा लगा। मैच करता हुआ मास्क लगाना चेहरे में बुरा नहीं लगेगा। मौके को दृष्टिगत रखते हुए कई बड़े स्कूलों ने अपनी ड्रेस से मेल खाते मास्क तैयार करवा रहे हैं। बच्चे जो मास्क लगाएंगे उसमें स्कूल का मोनोग्राम बना होगा। जाहिर सी बात है इस मास्क की कीमत विद्यार्थियों को ही अदा करनी होगी।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126