बारूद के ढेर में जिदंगी को दांव पर लगा रहे बाल श्रमिक

तालबेहट। सुरक्षा इंतजामों के बेहतर प्रबंधन न होने के कारण कई बार अतिशबाजी बनाते समय बारूद से हुए विस्फोट में जान चली जाती है। बावजूद इसके क्षेत्र में पटाखा निर्माण स्थलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। इन स्थानों में आर्थिक तंगी के चलते कई गरीब परिवारों के बाल मजदूर भी काम करते हैं। दीपावली के लिए नगर क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में पटाखा निर्माण शुरू हो जाता है। यहां बने पुंगी पटाखा झांसी, ललितपुर सहित मप्र के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। इनका निर्माण तरगुंवा रोड स्थित तीन स्थानों पर किया जा रहा है। एक स्थान पर खुले में पटाखे बनाए जा रहे तो वहीं दो स्थानों पर कमरे में कार्य किया जा रहा है। इन पटाखा फैक्ट्रियों में 12 से 15 वर्ष तक के किशोर निर्माण कार्य में लगे हैं। यहां सुरक्षा के नाम पर बालू भरी बाल्टियां रखी है। यहां दर्जनों की संख्या में मजदूर एक ही स्थान पर पन्नियों के सहारे डाले गए तंबुुओं में पटाखा निर्माण कर रहे हैं। जब अधिकारियों का काफिला सुरक्षा इंतजाम देखने के लिए आत है तो नजर पड़ते ही ऐसे कर्मियों को कारोबारी भगा देते हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन एक एक लाख से अधिक पुंगी पटाखों का निर्माण जारी है। इन स्थानों पर कई नशेबाज युवा भी कार्य कर रहे हैं। वह पूरे दिन पटाखा बनाने के बाद नशे की लत पूरी करने के लिए पूरे दिन बारूदी काम करते हैं। इन स्थानों पर भंडारण क्षमता से ज्यादा बारूद रखा हुआ है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी अनिल कुमार यादव का कहना है कि पटाखा निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा। सुरक्षा से खिलवाड़ और बाल मजदूर काम करते मिले तो कड़ी कार्रवाई होगी।
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