बाल कलाकार सुयश और राज की कल्पना शक्ति देती है बड़ा संकेत

अपनत्व’ के इन नन्हें चित्रकारों को मिला पूरे समाज का अपनत्व
देश में पहला स्थान पाने से प्रबंधक उपहार में चित्रकार को देंगे कैमरा
डॉ. राकेश द्विवेदी
‘अपनत्व’ के बच्चे अपनत्व पाने में सफल हुए। दोनों ने आखिर कुछ काम ही ऐसा किया है , जिससे वह दुलारे और पुचकारे जा रहे हैं। ऑन लाइन आर्ट परीक्षा में सुयश राज ने पहला और उसके भाई राजकिशोर ने प्रहरी सम्मान पाकर अपनी क्षमताओं से विद्यालय परिवार को भी खुशियों से भिगो दिया। इस कामयाबी पर स्कूल के प्रबंधक इस कदर भावविभोर हुए कि उन्होंने इन बच्चों की कला क्षमता विस्तार के लिए कैमरा भेट करने का निर्णय लिया।
शहर के आचार्य नरेन्द्र देव इंटर कॉलिज में ‘अपनत्व’ के माध्यम से उन बच्चों को शिक्षा दी जा रही है , जो बेहद प्रतिभाशाली हैं या वे जो आर्थिक विपन्नता के कारण के खुद के भरोसे शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते ! ऐसे बच्चों से अपनत्व की गोद पिछले तीन वर्षों से भरती आ रही है। सच्चाई यह भी है कि अपनत्व के बच्चों ने शैक्षिक और सांस्कृतिक- दोनों क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है। जब भी मौका आया बच्चों ने विद्यालय परिवार को आत्म विभोर कर दिया।
एक बार फिर अवसर आया तो कक्षा 11 के छात्र सुयशराज वर्मा ने सफलता की ऊंची छलांग लगा दी। यह छलांग अब तक कि छलांगों में जिले के लिए सबसे ऊँची रही। बागबान चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस पर ऑन लाइन आर्ट प्रतियोगिता आयोजित हुई। इस प्रतियोगिता में दिल्ली, राजस्थान,मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश के 137 बाल कलाकारों ने भागीदारी की। सुयश ने इसमें अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन किया। वह 137 प्रतिभागियों में अव्वल रहा। अपनी पेंटिग के द्वारा उसने एक बड़ा सन्देश दिया। सुयश ने समझाना चाहा कि पेड़ों की अंधाधुंध कटान और फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले धुएं से हवा प्रदूषित हो रही है। इसका बुरा असर आम जनमानस के स्वास्थ पर पड़ रहा है। ऑक्सीजन की कमी से बच्चे तक बीमार हो रहे हैं। ऑयल पेंटिंग में सभी चित्र बखूबी अपनी उपस्थिति दर्शा रहे हैं। उसकी कला में गजब की कलाकारी दिखती है। सुयश का छोटा भाई राजकिशोर भी कम नहीं। वह भी छिपा रुस्तम निकला। उसकी तरफदारी तो उसके पिता ने ही यह कहकर कि ‘ राजकिशोर तो सुयश से कहीं ज्यादा अच्छा चित्रकार है ‘ चुटकियों में वह किसी के चेहरे का स्केच बना देता है। राजकिशोर अब दसवीं का विद्यार्थी है। वह इसी में अपने कल की यात्रा तय करना चाहता है। वहीं सुयश कला के द्वारा महज अपनी कल्पना शक्ति को संतुष्टि देना चाहता है। वह अभिनेता सलमान खान से प्रभावित है और आगे चलकर इसी क्षेत्र में भविष्य निखारने की इच्छा संजोए हुए है। एक खास बात यह है कि सुयश के पिता कुशलकुमार भी आर्टिस्ट्स हैं। यहाँ तक कि उसकी छोटी बहन सिमरन तक ब्रश- रंगों से खेलना पसंद करती है।
कॉलिज को खुशी मिली तो विद्यालय परिवार के मुखिया सुदामा दीक्षित ( प्रबंधक ) भी खुशियों में समाहित हो गए। दोनों भाइयों की कला क्षमता से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी तरफ से उन्हें एक कैमरा उपहार स्वरूप देने की बात कही । बच्चों ने कहा था कि यदि उनके पास लैपटॉप और कैमरा हो तो वह अपनी कला को इससे भी बेहतर बना सकते हैं।
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