बुंदेलखंड के जालौन जनपद में पांच नदियों के संगम पर स्थित पवित्र तीर्थ पचनदा में नदी के किनारे मर गयीं हजारों मछलियां

बदबू से पर्यटक परेशान एवम क्षेत्रीय निवासी परेशान

उरई (जालौन)। पचनद पर सि॓ध, पहूंज,क्वारी, में बरसात का मटमैला पानी आने से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई जिससे हजारों मछलियां तड़पतीं और कई जानवर भी बहते हुए देखे गए पिछले 24 घंटे में लगभग दो मीटर पानी बढ़ गया है। हालांकि आसपास के गांवों को अभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। परंतु माना जा रहा है कि अगर इसी रफ्तार से पानी बढ़ता रहा तो नुकसान हो सकता है।
विकास खण्ड चकरनगर के धार्मिक स्थल महा कालेश्वर ओर रामपुरा विकास खण्ड का धार्मिक स्थल प्रसिद्ध बाबा सहाब मन्दिर के समीप पांच नदियों के संगम पचनद में बीती रात्रि समय क्वारी, सिंध और पहुज का जल स्तर बढ़ने से उक्त पानी में बहते हुए कई पशु भी देखे गये हैं। इसके अलावा गंदे पानी में मछलियां भी तड़पती देखी गयीं। वहीं नदी किनारे सब्जी की खेती करने वाले किसान नदी में पानी का तेज बहाव देखकर अपनी सब्जी तोड़ने में जुट गये हैं। इसके अलावा उक्त तीन नदियों के तेज पानी के बहाव ने यमुना और चंबल नदी के पानी के बहाव को रोक दिया है। मध्यप्रदेश से आने वाली सिंध व पहुज नदी में बुधवार को अचानक पानी बढ़ जाने के कारण यमुना व चंबल में ठहराव आ गया है। इनकी पानी निकासी रुक गई है और इनका पानी पीछे की तरफ लौट रहा है। पचनद पर ही पांचों नदियों का संगम होता है। सिंध व पहुज में पानी बढ़ने के कारण चंबल व यमुना में भी पानी बढ़ना शुरू हो गया है। हालांकि अभी इस प्रकार की कोई बात नहीं है क्यो कि प्रशासन खतरे की संभावना से इन्कार कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ नदी के किनारे वसे दो दर्जन से अधिक गांवों में में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है हालांकि यह जांच का विषय है लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी यहां पर देखने नहीं आया इससे साफ तौर पर स्पष्ट होता है इतनी बड़ी त्रासदी होने के बाद भी कोई भी अधिकारी ने यहां आने की तकलीफ़ नहीं की इससे साफ जाहिर है कि कितने लापरवाह हैं जनपद के अधिकारी।

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