बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अनूठा उदाहरण

मुख्यमंत्री इस योजना का कर चुके हैं शिलान्यास
अभावग्रस्त परिवार की है यह छात्राएं
4 बालिकाओं में दो की मां नहीं है और दो के पिता नहीं है
ऊंची कृत विद्यालय के लिए स्वीकृत नक्शा में संशोधन की जरूरत
अनिल शर्मा / संजय श्रीवास्तव / राकेश द्विवेदी
उरई। उत्तर प्रदेश में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय गुड़ा जालौन मैं है। जिसे डीएम डॉक्टर मन्नान अख्तर के प्रयासों से उच्चीकृत कर दसवीं तक किया गया था। यहां की अभावग्रस्त छात्राओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक करते हुए हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में 19 में से 18 छात्राओं ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की है। जबकि 5 छात्राओं ने विशेष योग्यता के साथ परीक्षा पास की है। इन मेधावी छात्राओं मे चार अभावग्रस्त छात्राएं ऐसी हैं जिनमें से दो के मां नहीं है जबकि दो छात्राओं के पिता नहीं है। लेकिन अभावग्रस्त छात्राओं ने पूरे प्रदेश में अपनी मेधा का झंडा गाड़ दिया है। यदि अभावग्रस्त इन छात्राओं को पढ़ने की सुविधा दी जाए तो वह नया इतिहास लिखने में सक्षम होगी।
मालूम हो कि पूरे प्रदेश में कस्तूरबा गांधी के 750 आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। पूरे देश में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का एक ही मॉडल है। वर्ष 2018 में बुंदेलखंड में जालौन के जिला अधिकारी डॉक्टर मन्नान अख्तर के साथ मिलकर विद्यालय के प्रबंधक और प्रख्यात समाजसेवी डॉ संजय सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल के साथ एक योजना तैयार की। जिसके तहत आठवीं पास इन छात्राओं के लिए आगे पढ़ने के लिए आवासीय विद्यालय में 19 छात्राओं को आवासीय सुविधा प्रदान की गई। इन सभी आठ पास19 छात्राओं का दाखिला जालौन नगर के आर्य कन्या इंटर कॉलेज में करवाया गया। 2 वर्ष तक इन सभी 19 छात्राओं को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में रखकर उन्हें भोजन, वस्त्र, पाठ्यपुस्तक और कोचिंग की सुविधा प्रदान की गई। यह कार्य समाज सेवी संस्था परमार्थ ने किया। इसमें निरंतर जिलाधिकारी का प्रोत्साहन इन बालिकाओं को मिलता रहा। अभावग्रस्त छात्राओं ने अपने गांव में न सब्जी का स्वाद चखा था न पेस्ट और ब्रश जानती थीं। राख दातुन से ही कुल्ला करती थी और चटनी रोटी अक्सर इन का भोजन होता था। कभी दाल मिल गई तो बड़ी बात है यह सब अच्छा खाना अच्छा पहनने का सुख इन छात्राओं को इसी आवासीय विद्यालय में आकर मिला। जिसकी चर्चा अक्सर यह छात्राएं करती हैं। इन छात्राओं में से चार में मेधावी छात्र हैं ऐसी हैं जिनमें से दो के मां नहीं हैं जबकि दो के सिर से पिता का साया उठ गया है। इनमें से मेधावी छात्रा मधु और कीर्ति सोने की मां नहीं है। जबकि मेधावी छात्रा निशा जाटव और निशा पाल के पिता नहीं हैं। इनमें से 18 छात्राएं प्रथम श्रेणी में तथा पांच छात्राएं विशेष योग्यता के साथ पास हुई हैं। जिनमें लक्ष्मी पिता राम खिलौने ने हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा में 80% अंक प्राप्त किए हैं। अंशका जाटव पिता चंद शेखर ने 78% , साधना पिता शिव सिंह 77%,, रोहिणी पिता अमर सिंह ने 76%, संजुम पिता राजेश कुमार ने 70% , मधु पिता राम प्रकाश ने 75% अंक लेकर नाम रोशन किया है। इनके अलावा 13 छात्राओं ने प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास की है। जबकि एक छात्रा द्वितीय स्थान पर रही है। यह नवाचार उत्तर प्रदेश के 750 विद्यालयों में सिर्फ जालौन में किया गया। इस विद्यालय को प्रदेश सरकार द्वारा उच्चीकृत किया गया। जिसका शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले लखनऊ में कर चुके हैं। जिले में भवन निर्माण के लिए बजट भी प्रदेश सरकार से आ चुका है। किंतु डिजाइन के अनुसार जगह की कमी है। डिजाइन में संशोधन करके भवन निर्माण कराया जा सकता है । कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के सामने 6 एकड़ जमीन ग्रामसभा की पड़ी है। जिसे ग्रामसभा स्वेक्षा से देना चाहती है। फिर भी भवन का निर्माण यहां नहीं किया जा रहा है। जिन मेधावी बच्चों ने मेहनत कर अच्छे परिणाम दिए हैं। यदि इन अभावग्रस्त मेधावी छात्राओं को आगे पढ़ने के लिए मौका नहीं मिला और इस आवासीय उच्च विद्यालय का भवन नहीं बना तो एक बार फिर यह अभावग्रस्त छात्राएं अपने अपने घर वापस चली जाने को मजबूर होंगी। और इसके बाद इनके भविष्य के सामने अंधेरा विकराल रूप धारण कर खड़ा हो जाएगा।