ब्राह्मणों के वोटों के डैमेज कंट्रोल के लिए अमित शाह ने लिया संज्ञान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बसपा सुप्रीमो मायावती तथा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह

मायावती के बयान कि कोई पूरी बिरादरी दोषी नहीं होती से भाजपा में हड़कंप
चर्चाओं का अनुसार अमित शाह ने प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों का लिया फीडबैक
शिव प्रताप शुक्ला को राज्यसभा में सचेतक बनाया गया
उप्र में योगेन्द्र उपाध्याय को विधानसभा का सचेतक बनाया गया
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

दिल्ली। माफिया डान विकास दुबे के पुलिस एनकाउण्टर के पहले जिस तरह से उसके कई करीबी गुर्गे पुलिस एनकाउण्टर में मारे गए। उसके खजांची जय बाजपेयी सहित कई गिरफ्तार हुए। जिनमें महिलाएं भी हैं। इन सब घटनाओं को लेकर आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने पिछले दिनों संकेतों में ब्राह्मणों को लेकर जो बयान दिया कि किसी बिरादरी में किसी एक व्यक्ति के खराब होने से पूरी बिरादरी को खराब नहीं कहा जा सकता है।
सुश्री मायावती के इस बयान को लेकर भाजपा में हड़कंप मच गया। कहीं भाजपा से ब्राह्मण वोट खिसक न जाए। इसकी चिंता पार्टी हाइकमान को हुई। तो भाजपा के चाणक्य और संकट मोचक माने जाने वाले केन्द्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह ने डैमेज कंट्रोल करते हुए तत्काल भाजपा के उप्र के अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से फीडबैक लिया। प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा के ब्राह्मण विधायकों एवं सांसदों से इस दौरान हुई बातचीत का ब्यौरा पार्टी के शीर्ष नेता अमित शाह को दिया। लेकिन बात यहीं नहीं थमी, भाजपा के कद्दावर ब्राह्मण नेता और राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला को आनन फानन में राज्य सभा का सचेतक बनाया गया। श्री शुक्ला उच्च सदन (राज्य सभा) में भाजपा सांसदों को व्हिप जारी करने की जिम्मेदारी अब उनके ही कंधों पर होगी। वे उप्र के गोरखपुर से आते हैं और ब्राह्मणों के प्रभावी चेहरे के रूप में देखे जाते हैं।
भाजपा ने अभी तीन दिन पहले ही उप्र की विधान सभा में ब्राह्मण नेता और आगरा से विधायक योगेन्द्र उपाध्याय को उप्र विधानसभा का भाजपा का सचेतक बनाया है। असल में विकास दुबे के एनकाउण्टर को लेकर जिस तरह सोशल मीडिआ पर सवाल उठे, जिस तरह से प्रसिद्ध पत्रकार सौरभ द्विवेदी के चर्चित कार्यक्रम लल्लन टाप में पुलिस के एनकाण्टर को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। खास तौर पर लोगों का कहना था कि माफिया डान विकास दुबे को कोर्ट से फांसी होनी चाहिए थी। इससे न्याय पलिका का सम्मान रहता और लोगों में यह संदेश जाता कि कोई कितना भी अपराधी क्यों न हो, उसे कोर्ट सजा देने में सक्षम है और हमारी पुलिस व्यवस्था भी संविधान के दायरे में चलती है।
इस दौरान बसपा सुप्रीमो ने जो अगला वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम, पिछला और दलित बेसवोट को लेकर लड़ना चाहतीं है। जिस तरह से उन्होंने 2007 का चुनाव लड़ा था। बसपा ने अकेले दम 206 सीटें जीतकर अपने बलबूते सरकार बनाई थी। भाजपा में ब्राह्मण जनप्रतिनिधि अपने को थोड़ा निराश महसूस करते रहे हैं। मायावती का बयान इस स्थिति को भांपकर भी दिया गया बताया जा रहा है। बसपा सुप्रीमो की इस रणनीति को भांपकर ही भाजपा में हड़कंप मचा और ब्राह्मणों के वोटों का डैमेज कंट्रोल करने के लिए भाजपा के शीर्ष और ताकतवर नेता अमित शाह ने इस मुद्दे पर बिना देर किए ऐसी चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से गहन मंत्रणा की और उप्र में ब्राह्मण विधायकों ओर सांसदों का फीडबैक लिया। बहरहाल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ब्राह्मणों के वोटों को लेकर आगे भी और रणनीति बनाने में जुटा हुआ है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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