ब्राह्मण नेताओं को लपकने की जंग में प्रतिद्वंदियों से आगे निकल रही है भाजपा

कभी भी कई साथी नेताओं के साथ भाजपा में चले जाएंगे रामवीर उपाध्याय

बसपा के कद्दावर नेता और दबंग मंत्री रह चुके हैं रामवीर

मायावती की मुट्ठी में आ चुकी है विकास दुबे की पत्नी ऋचा तो भाजपा के संपर्क में हैं बड़े ब्राह्मण दिग्गज

अपने दलों से निकाले गए या उपेक्षित चल रहे ब्राह्मण नेताओं में भाजपा के प्रति होती दिख रही है लामबंदी

चुनाव के दौरान अखिलेश के अल्लाह-अल्लाह के मंत्र का जाप करने की संभावना

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव की गोपनीय चुनावी रणनीति दिखाने लगी है असर

प्रदेश के बसपा काल मे धाकड़ मंत्री और पकड़दार ब्राह्मण नेता रामवीर उपाध्याय और उनके पुत्र चिराग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट करके आज अपने पत्ते खोल दिये। बस भाजपा जॉइन करने की उनकी घोषणा भर बाकी है। उनके इस कदम का अनुसरण करने के लिए प्रदेश के अनेक ब्राह्मण नेता जिनमे से ज़्यादातर उपेक्षित चल रहे हैं। योगी आदित्यनाथ से संपर्क साधने में जुटे हैं। इस सच्चाई को गोपनीय रिपोर्टें भी स्वीकार कर रही हैं।

राजनीति के मर्मज्ञ मान रहे हैं कि जबसे सपा ने राम के मुकाबले चुनावी मुकाबले के लिए परशुराम को खड़ा किया और मायावती भी इस मुहिम में उनके साथ हो गईं। तो ब्राह्मण जो सर्वाधिक राम भक्त हैं। उन्हें एवम सभी जातियों को परशुराम के मुकाबले श्री राम से बहुत अधिक श्रद्धा है। ऐसे में धार्मिक मन के ब्राह्मण नेताओं को आध्यात्मिक निष्ठा के आधार पर राम के मुकाबले परशुराम को खड़ा करने वाली बात उनके गले से नीचे नहीं उतरी। शायद इसलिए तमाम नेताओं और जनता के द्वारा माफिया विकास दुबे के गिरोह का बर्बरता पूर्वक खात्मा कर देने वाली भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध जो माहौल बन रहा था। उसे भगवान राम की भक्ति ने शायद ठंडा कर दिया। और अब ऐसा लगता है कि यूपी के अगले राजनीतिक समीकरण में भाजपा जहां श्री राम का मंदिर बनवाने के विश्व्यापी प्रकरण का राजनीतिक लाभ उठाने का पूरा प्रयास करेगी। वहीं सपा संरक्षक मौलाना कहे जाने वाले मुलायम सिंह के पुत्र सपा के अध्यक्ष और अपनी सेना के सारथी अखिलेश अपने बुनियादी वोटों को समेटते हुए अल्लाह-अल्लाह का “मंत्र” जपते नजर आएंगे। बसपा अपने चौधरी वोटों की मजबूत लामबंदी के साथ सभी दलों के टूटे वोटों और नेताओं को बटोरेगी। मगर यह समीकरण तो भविष्य के हैं। अभी तो जो होता जाए उसे देखते जाने का समय है।

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