भाईदूज पर भाई ने ऐसे निभाया फर्ज, ये दिया उपहार

अमरोहा: जनपद के हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव में भाईदूज से पहले एक भाई ने अपनी बहन को एक ऐसा नायाब तोहफा दिया है, जिसको लेकर वह बहन उसे जिंदगी भर याद रखेगी. इस तोहफे की चर्चा अमरोहा जनपद से लेकर अन्य जनपदों में भी हो रही है.
छोटे भाई ने दी बहन को किडनी
जनपद के हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव ढबारसी की ग्राम प्रधान पारुल गोयल को उसके भाई ने अपनी एक किडनी देकर जान बचाई है. दरअसल, पारुल नाम की महिला कई महीने से किडनी खराब होने की वजह से मौत से जंग लड़ रही थी. डॉक्टरों ने बताया कि अगर पारुल को दूसरी किडनी मिलती है तो उसकी जान बच सकती है. इस बात की जानकारी पारुल के छोटे भाई को चली तो उन्होंने अपनी बहन को किडनी देने का फैसला किया.
हसनपुर गांव से हत्या की वारदातें सामने आती रहती हैं, लेकिन अंकित नाम के युवक ने अपनी बहन को किडनी दान देकर इन चर्चाओं को विराम दिया है.
भाई ने पेश की मिसाल
ग्राम प्रधान पारुल गोयल बताती हैं कि भाई हमेशा से बहनों की रक्षा करते आए हैं, लेकिन मेरे भाई अंकित ने मुझे नया जीवन दान देकर समाज के लिए एक नई मिसाल पेश की है.
पारुल के पति ने बताया कि उनकी पत्नी की दोनों किडनी खराब थी. इसके बाद इलाज के लिए उसे दिल्ली-मेरठ ले जाया गया. मगर उन्हें निराशा हाथ लगी. ससुराल वालों की तरफ से कोई भी एक किडनी डोनेट करने को तैयार नहीं था. उसके बाद मेरठ में चिकित्सकों ने पारुल को घर ले जाने को कहा.
ससुर की किडनी नहीं हुई मैच
इसके बाद पहले उनके ससुर कैलाश चंद्र अग्रवाल ने अपनी किडनी देने का निर्णय लिया था, लेकिन जांच में उनकी किडनी मैच नहीं हो सकी. इसी बीच डायलिसिस के दौरान उनकी पत्नी को दर्द से करहाते देख पांच बहन व तीन भाइयों में मझले अंकित अग्रवाल ने अपनी किडनी देने का फैसला किया और पारुल के 33 वर्षीय छोटे भाई अंकित ने अपनी किडनी देने का फैसला किया. पारुल के पति राजीव गोयल ने कहा कि भाई तो हमेशा ही बहन की रक्षा करता, लेकिन मेरे साले(अंकित) ने जो मेरी पत्नी को नया जीवनदान दिया है, जिसका एहसान हम मरते दम नहीं भूलेंगे.
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