मनोज सिन्हा के माध्यम से मोदी ने एक तीर से चार निशाने साधे

बिहार में भूमिहार मतदाताओं की संख्या लगभग 11 प्रतिशत है

उप्र में लगभग 4 प्रतिशत भूमिहार मतदाता हैं

बंगाल में 3 प्रतिशत भूमिहार मतदाता हैं

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश् द्विवेदी

दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने चहेते नेता मनोज सिन्हा पूर्व रेल राज्य मंत्री को जम्मू कश्मीर का नया उपराज्यपाल बनाकर एक तीर से चार निशाने साधने का काम किया। मालूम हो कि कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीष मुर्मू ने अपने कार्यकाल में कश्मीर में विरोधी नेताओं से संवाद शुरू करने का काम तेजी से नहीं कर पाया। कश्मीर में धारा 370 और 35ए हटाने के एक वर्ष बीतने के बाद भी कश्मीर में राजनैतिक हालात तेजी से सामान्य करने की केन्द्र सरकार ने जो रणनीति बनाई थी, उसमें अमल नहीं हो पाया। उसमें गुजरात कैडर के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी तथा प्रधान सचिव गिरीष मूर्मू खरे नहीं उतर पाए। इसी के चलते केन्द्र सरकार ने मनोज सिन्हा, जो आइआइटियन भी हैं और रेल राज्यमंत्री के रूप में खामोशी से काम करने के लिए जानेजाते हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कितने करीबी हैं इसका अंदाजा इसी से हो जाता है कि वर्ष 2019 में मोदी की सुनामी में गाजीपुर से लोकसभा का चुनाव हार जाने के बाद भी मोदी उन्हें उप्र का मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे। मोदी की सूची में उप्र के संभावित मुख्यमंत्रियों के नामों में सबसे पहला नाम मनोज सिन्हा का ही था।
क्योंकि पीडीपी की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती आज भी नजरबंद हैं, जबकि नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, अब्दुल सज्जाद गनी लोन सहित तमाम नेताओं की नजरबंदी अब समाप्त हो चुकी है। पीडीपी के तमाम नेता अपनी पार्टी छोड़ चुके हैं। केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में जिस तरह से पंचायत के चुनाव कराए। पंचायत के बजट को दागुना कर दिया गया। पंचों सरपंचों को गांव में स्कूल अस्पताल बनाने के अधिकार दे दिए गए। इसके कारण केन्द्र सरकार का समर्थन करने वाले बड़ी संख्या में पंचायत जनप्रतिनिधि मिल गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि नए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बड़ी तेजी से जम्मू कश्मीर में राजनैतिक हालात सामान्य कराएं। इन सभी विरोधी नेताओं से संवाद प्रारम्भ हो। इसके साथ जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों के साथ उपराज्यपाल का सीधा संवाद हो ताकि कश्मीर के लोगों की समस्याओं का तेजी से निराकरण हो। कश्मीर में पर्यटन और व्यापार तेजी से बढ़ाया जाए, ताकि आम लोगों और व्यापारियों की आर्थिक स्थिति सुधर सके। क्योंकि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा उप्र के गाजीपुर जिले के हैं और भूमिहार जाति से आते हैं। इसके अलावा मनोज सिन्हा केा उपराज्यपाल बनाकर श्री मोदी ने एक तीर से चार निशाने लगाने की कोशिश की। पहले तो कश्मीर की स्थिति को सामान्य करना। आने वाले समय में बिहार में विधानसभा के चुनाव होन वाले हैं। बिहार में भूमिहार जाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 11 प्रतिशत है। इनमें ब्राह्मण, राजपूत और कायस्थ भी भूमिहार जाति में गिने जाते हैं।
जब मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया तो बिहार, उप्र, मध्य प्रदेश और बंगाल के भूमिहारों में खुशी की लहर दौड़ गई। श्री मोदी ने इस बहाने बिहार के भूमिहारों को साधने की कोशिश की है। बिहार के बाद बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं। वहां भी भूमिहार मतदाताओं की संख्या 3 प्रतिशत है। इस कदम से बंगाल में भी भूमिहारों को जोड़ने में मदद मिलेगी। इसके बाद 2022 में उप्र में विधानसभा के चुनाव हैं। यहां भूमिहार मतदाताओं की संख्या लगभाग 4 प्रतिषत है। उप्र के पूर्वांचल के जिलों गाजीपुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, गोरखपुर, चन्दौली और वाराणसी सहित कई जिलों में भूमिहारों की अच्छी खासी संख्या हैं। उन्हें भाजपा में जोड़ने में काफी मदद मिलेगी।

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