मप्र के उपचुनाव कांग्रेस बनाम कांग्रेस होंगे

संघ और भाजपा के नेताओं ने सिंधिया के प्रभाव के अलावा दस से पन्द्रह कांग्रेसी विधायकों को भाजपा में लाने की रणनीति बनाई
उधर कांग्रेस भाजपा का टिकिट न पाने वाले दावेदारों के विरोध में अपनी नजर गड़ाए हुए है
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले चंबल ग्वालियर क्षेत्र में उनके समर्थकों को पटखनी देने की तैयारी में

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी सितंबर माह में होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर आरएसएस के पदाधिकारियों और भाजपा के नेताओं में यह गहन मंथन चल रहा है कि उपचुनाव सिंधिया के प्रभाव के चलते कांग्रेस छोड़कर आए 22 विधायकों के कारण हो रहा है। जिससे यह उपचुनाव कांग्रेस बनाम कांग्रेस का बन गया है।
संघ और भाजपा नेताओं कि फिक्र यह है कि यदि इस चुनाव में सिंधिया के 22 में से अधिकांश विधायक चुनाव जीत गए तो मप्र में सिंधिया सत्ता का एक और केन्द्र बन जाएंगे। इसको लेकर भाजपा और संघ के पदाधिकारियों ने गहन मंथन किया कि भाजपा में सिंधिया को सत्ता का दूसरा केन्द्र न बनने देने के लिए जरूरी है कि उपचुनाव से पहले कांग्रेस के 12 से 15 विधायकों को भाजपा में और शामिल कराया जाए। मालूम हो कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे, तो उनके समर्थन में आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों सहित कुल 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे।
इसी दौरान दो विधायकों मनोहर उठवाल, बनवारी लाल शर्मा की मृत्यु हो जाने के कारण दो सीटें रिक्त हो गईं थीं। इस तरह से तब मप्र में 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना था। लेकिन संघ और भाजपा नेताओं की रणनीति के चलते छतरपुर की बड़ा मलहरा विधानसभा सीट से कांग्रेसी विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए भाजपा की फायरब्रांड नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने पिछले दिनों भाजपा में शामिल करा लिया था। उमा भारती के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रद्युम्न सिंह लोधी को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का चेयरमेन बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया था।
इसके बाद भाजपा और संघ की नई रणनीति के कारण खंडवा के कांग्रेसी विधायक नारायण सिंह पटेल और आदिवासी क्षेत्र की कांग्रेसी महिला विधायक सुमित्रा देवी ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया है। इस तरह से चुनाव के लिए रिक्त हुई सीटों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। केन्द्रीय चुनाव आयोग के द्वारा मप्र में उपचुनाव की तिथियां घोषित होने से पहले भाजपा और संघ के रणनीतिकार 12 से 15 और कांग्रेसी विधायकों को तोड़कर भाजपा शामिल करा लेना चाहते हैं, ताकि जब उपचुनाव हो तो यह संख्या बढ़कर लगभग 40 हो जाए। इसी के कारण अब भाजपा और संघ में यह कहा जाने लगा है कि मप्र के उपचुनाव तो कांग्रेस बनाम कांग्रेस होने जा रहे हैं।
इस स्थिति को भांपकर और कांग्रेस का बजूद बचाए रखने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ तथा कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी दृष्टि और राजनैतिक चौसर भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र चंबल ग्वालियर संभाग में बिछा दी है। क्यों कि इस क्षेत्र से कांग्रेस के 16 ऐसे विधायक हैं जिन्होंने सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्या ली है और उपचुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस से आए इन विधायकों को भाजपा से टिकिट मिलना लगभग तय है। इसलिए कांग्रेस के ये दोनों दिग्गज नेेता कमल नाथ और दिग्विजय सिंह की कोशिश यह है कि भाजपा में इन 16 स्थानों पर टिकिट न मिलने कारण भाजपा के जो टिकिट के कद्दावर दावेदार हैं। उन्हें कांग्रेस में मिलाकर कांग्रेस से टिकिट दे दिया जाए, क्योंकि भाजपा और संघ के कार्यकर्ता कांग्रेस से दल बदलकर भाजपा में आए को दिल से पचा नहीं पाएंगे। उनके भीतर इन आयातित प्रत्याषियों को लेकर पराएपन का भाव रहेगा। इसी का फायदा उठाते हुए कांग्रेस के ये दो दिग्गज नेता सिंधिया को उन्हीं के घर में मात देने की रणनीति बना रहे हैं।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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