मप्र के उपचुनाव में भाजपा के बागी नेता बन सकते हैं कांग्रेस प्रत्याशी

माह सितंबर में 25 विधानसभा सीटों पर होने हैं उपचुनाव
सागर जिले में सुरखी विधानसभा सीट से भाजपा के बड़े नेता सुधीर यादव ने बगावती तेवर अपनाए
भाजपा के कई विधानसभा क्षेत्रों में नेता कर सकते हैं बगावत
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कमल नाथ और दिग्विजय सिंह बना रहे हैं रणनीति
सिंधिया के क्षेत्र चंबल ग्वालियर संभाग में हैं सबसे ज्यादा 16 विधानसभा सीटें
कमल नाथ और दिग्विजय सिंधिया को पटकनी देने की रणनीति बनाने में जुटे
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कद्दावर कांग्रेसी नेता को भाजपा में शामिल करा लेने से भाजपा मप्र में लगातार चैथीबार शिवराज सिंह की सरकार बनाने में तो सफल हो गई। लेकिन आगामी सितंबर माह में होने वाले 25 विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा के खेमे में भी विरोध के स्वर तेजी से उभरने लगे हैं। इस संभावना को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भी गोटें बिछानी शुरू कर दी है।
उन्हें सबसे पहली सफलता सागर के बड़े नेता व सांसद लक्ष्मी नारायण यादव के पुत्र और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर यादव ने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सुधीर यादव ने पिछला विधानसभा चुनाव सुरखी से भाजपा के टिकिट पर सिंधिया के करीबी और तब कांग्रेस के प्रत्याशी गोविन्द सिंह राजपूत के खिलाफ लड़ा था। इसमें वे थोड़े मतों से हार गए थे। सुधीर यादव अब भी सागर में भाजपा के बड़े नेता हैं लेकिन कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए गोविन्द सिंह राजपूत को टिकिट मिलना तय है। इससे भाजपा में सुरखी विधानसभा सीट को लेकर भाजपा नेता सुधीर यादव ने बगावत का झण्डा उठा लिया है।
इसी तरह भाजपा के वरिष्ठ नेता पारुल साहू और राजेन्द्र मोकलपुर भी खुलकर गोविन्द सिंह राजपूत का विरोध कर रहे हैं। उधर भाजपा के भीतर छतरपुर जिले में भी विरोध के स्वर उठ रहे हैं। बड़ा मलहरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी को पिछले दिनों भाजपा की फायरब्राण्ड नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रयास करके जिस तरह पार्टी में शामिल कराया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार में खाद्य और आपूर्ति निगम का चेयरमेन बनवाकर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिलवाया। इसके साथ यह पच्चीसवीं विधानसभा की सीट बड़ा मलहरा भी रिक्त हो गई है। प्रद्युम्न सिंह लोधी कैबिनेट मंत्री का दर्जा पा गए हैं, इसलिए राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि इस सीट से उमा भारती चुनाव लड़ सकती हैं।
भाजपा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा चंबल ग्वालियर संभाग है, जहां 16 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। ये सभी विधायक सिंधिंया के समर्थन में अपनी विधायकी छोड़कर भाजपा में आए हैं। इन में से अधिकांश मंत्री बन गए हैं। इसीलिए ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस से आए सिंधिया समर्थकों को टिकिट मिलना लगभग तय है। इसको लेकर भाजपा के टिकिट के दावेदार और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं में रोष है। इसे भांपकर कांग्रेस के अध्यक्ष कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और इस संभाग में ठाकुर बिरादरी में अपनी पकड़ रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कांग्रेसी सांसद दिग्विजय सिंह कमल नाथ के साथ मिलकर सिंधिया कि समर्थकों को मात देने की रणनीति बना रहे हैं।
खास बात यह है कि इस क्षेत्र में भाजपा के जिन टिकट के दावेदार और कर्मठ नेताओं केा टिकिट नहीं मिलेगा वे या तो कांग्रेस से टिकिट मांगेंगे या निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। इस स्थिति को मद्दे नजर रखकर कमल नाथ और दिग्विजय सिंह सागर में जिस तरह से भाजपा सांसद के पुत्र सुधीर यादव को कांग्रेस से टिकिट देने का मन बना रहे हैं। इसी तरह जहां जहां भी भाजपा के टिकिट के दावेदार मजबूत नेता होंगे। उन्हें कांग्रेस से टिकिट देकर भाजपा और दिग्विजय सिंह ग्वालियर चंबल संभाग में सिंधिया और उनके समर्थकों को मात देने की रणनीति बना रहे हैं।
हालांकि परिणाम चाहे जो हो लेकिन अगर कांग्रेस से सिंधिया के साथ भाजपा में आए नेताओं का लाभ भाजपा को हुआ है। वहीं इस उपचुनाव में भाजपा के टिकिट को लेकर तमाम भाजपा नेता बागी हो जाएंगे। वे या तो कांग्रेस से टिकिट लेेंगे या निर्दलीय बनकर चुनाव लड़ सकते हैं। जिससे भाजपा और उसके संगठन को नुकसान हो सकता है और कांग्रेस यही चाहती है।

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