मप्र के उपचुनाव में सिंधिया के वर्चस्व वाले ग्वालियर चंबल संभाग क्षेत्र में कमल नाथ दे सकते हैं चुनौती

मप्र में 24 विधान सभा सीटों के लिए हो रहे हैं उपचुनाव
सिंधिया ने अपने कोटे के 6 की जगह 14 को दिलाया मंत्री पद
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
ग्वालियर चंबल संभाग। मप्र में 24 विधान सभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में यह चर्चा जोरों पर है। हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा भाजपा राज्य सभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर चंबल संभाग में जहां उनका वर्चस्व है। उसे तोड़ने के लिए कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ग्वालियर चंबल संभाग की भिण्ड-मुरैना जिलों में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ सकते हैं। यह चर्चा जोरों पर है। मालूम हो कि मध्य प्रदेश में माह सितम्बर तक 24 विधान सभा सीटों के लिए उपचुनाव होने जा रहे हैं।
इस उपचुनाव में ग्वालियर चंबल संभाग में सर्वाधिक 16 सीटें हैं। इस क्षेत्र में लम्बे अरसे से ग्वालियर राजघराने के श्रीमंत व पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा वर्तमान राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा चला आ रहा है। वे इस क्षेत्र में जिस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करते हैं और अपना खुला समर्थन देते हैं। वह प्रत्याषी अकसर चुनाव जीत जाता है। पिछले घटनाक्रम में जब कांग्रेस के मप्र के मुख्यमंत्री कमल नाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमजोर करने की कोशिश में लगे थे। तब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह का भरपूर साथ मिलता रहा। इसकी शिकायत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृतव सोनिया गांधी व राहुल गांधी से भी की थी। लेकिन जब बात नहीं बनी तो कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन करली।
इसका परिणाम यह हुआ कि सिंधिया के समर्थक 6 मंत्री सहित कुल 22 विधायकों ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन करली। इससे कांग्रेस विधायकों की सदस्यता भले ही चली गई हो लेकिन कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमल नाथ की सरकार अल्पमत में आ गई और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उधर सिंधिया के कद का इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मंत्री मण्डल विस्तार में 22 में से 14 को मंत्री बना दिया गया।
देश के इतिहास में किसी विधान सभा में इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मंत्री बनाए गए हैं। जो किसी भी विधान सभा के सदस्य तक नहीं है। इस उपचुनाव में 24 में से 16 विधान सभा सीटें अकेले ग्वालियर चंबल संभाग में हैं। जहां सिंधिया का दबदबा है। ऐसे में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके ही गढ़ में चुनौती देने का मन बना लिया है। ऐसी चर्चा जोरों पर है कि कमल नाथ ग्वालियर चंबल संभाग के भिण्ड या मुरैना जिलों में से किसी एक विधान सभा सीट पर चुनाव लड़ सकते हैं। भिण्ड मुरैना क्षेत्र जो ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र है वहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भी लोगों पर अच्छी पकड़ है।
उधर जनता में सिंधिया की यह धाक बैठ गई है कि उन्होंने अपने समर्थकों को विधायक न रहते हुए भी अपने कोटे से शिवराज सिंह के मंत्री मण्डल में पहले ज्यादा संख्या में मंत्री बनवा दिया है। अब ये जो मंत्री बन गए हैं, इनमें इमरती देवी, ओपीएस भदौरिया, बृजेन्द्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, हरदीप सिंह डांग, एदल सिंह कंसाना, बिसाहू लाल सिंह, महेन्द्र सिंह सिसौदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर ये सभी मंत्री अपनी विधान सभा क्षेत्रों में अभी से सरकारी गाड़ियों में, सरकारी खर्चे पर अपनी विधान सभा क्षेत्र और अन्य 23 भाजपा प्रत्याशियों की विधान सभा सीटों पर न केवल अभी से प्रचार करने जाएंगे। केन्द्रीय चुनाव आयोग जब तक चुनाव की तिथियों की घोषणा नहीं करता और आचार संहिता नहीं लगती इस के पहले सभी मंत्री अपने विधान सभा क्षेत्रों में तथा बाकी भाजपा के अन्य चुनाव क्षेत्रों में जाकर जनहितकारी कार्यों को कराएंगे और तमाम लोक लुभावन घोषणाएं करेंगे। इस का लाभ इन भाजपा के प्रत्याषियों को मिलेगा।
इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तथा अन्य प्रदेशों के भाजपा और उनके सहयोगी दलों के मुख्यमंत्री भी इन उपचुनावों में आएंगे। इसका भी लाभ भाजपा प्रत्याशी लेने की कोशिश करेंगे। वहीं कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सोनियां गांधी, राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी के अलावा तमाम पूर्व केन्द्रीय मंत्री चुनाव सभाओं में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और उनकी टीम के पक्ष में धुआंधार चुनाव प्रचार करेंगे। इस उपचुनाव में सिंधिया को एक यह घाटा हो सकता है यदि वह अपेक्षित सीटें भाजपा को नहीं जिता पाए तो फिर भाजपा में उनका यह कद नहीं रहेगा जो आज है।