मायावती की गुगली से हतप्रभ है कांग्रेस

राजस्थान और मध्य प्रदेश में बसपा के विधायकों को कांग्रेसमें मिलाने से खफा है मायावती

मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों में होने हैं उपचुनाव

ज्योतिरादित्य सिंधिया के गण ग्वालियर चंबल संभाग में अकेले 16 विधानसभा सीटों पर होना है उपचुनाव

कांग्रेश से बदला लेने को बसपा सुप्रीमो मायावती ने ग्वालियर चंबल संभाग में बसपा से 8 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ इस चुनौती से परेशान

अनिल शर्मा+ संजय श्रीवास्तव +डॉ राकेश द्विवेदी

ग्वालियर चंबल संभाग। बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती राजस्थान व मध्यप्रदेश में कांग्रेश के द्वारा उनके विधायकों को तोड़े जाने से खासी खफा हैं उन्होंने कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए ग्वालियर चंबल संभाग क्षेत्र में जहां कांग्रेस से भाजपा में अपने समर्थक 22 विधायकों के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में आए थे इन विधायकों में से 6 कमलनाथ सरकार में मंत्री थे उन सब ने मंत्री और विधायक पद से इस्तीफा दे दिए थे जिसकी वजह से कांग्रेश की कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी और मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा था जिसके कारण फिर से चौथी बार भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने ग्वालियर चंबल संभाग में ज्योतिरादित्य सिंधिया को सबसे ताकतवर नेता माना जाता है क्योंकि वह कांग्रेस से भाजपा में आ गए हैं इसलिए अब भाजपाई अपने को इस क्षेत्र में पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में पा रहे हैं कांग्रेसका शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी राहुल गांधी प्रियंका गांधी कांग्रेस के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का सोच है क्योंकि 16 विधायक कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे इसलिए उनके कांग्रेश से इस्तीफा देकर भाजपा में सिंधिया के साथ जाने से इस क्षेत्र का मतदाता दल बदलू विधायकों से नाराज है। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में दल बदलू बोको हराम का नारा भी दे रखा है क्योंकि यह 16 विधायक जो कांग्रेसी छोड़कर भाजपा में आए हैं उन्हें भाजपा से टिकट मिलना लगभग तय है। जिसका असर ग्वालियर चंबल संभाग के उन 16 विधानसभा सीटों पर पड़ेगा जहां भाजपा के टिकट पर प्रबल दावेदारों का टिकट कटना लगभग तय है। इससे इसकी पूरी संभावना है इन 16 विधानसभा सीटों पर भाजपा के तमाम टिकट के दावेदार व प्रमुख नेता भाजपा छोड़कर या तो विद्रोही के रूप में या फिर कांग्रेसी टिकट लेकर उप चुनाव लड़ सकते हैं कांग्रेसी नेता तो इसी का इंतजार कर रहा है वह इन 16 सीटों पर भाजपा विद्रोहियों को ज्यादा से ज्यादा टिकट देने की रणनीति बना रहा है। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व जिस सिद्धांत को लेकर मतदाता का गुस्सा भड़का रहा है कि दलबदलू को हर आओ और इस मुद्दे को लेकर पिछले दिनों उसने भिंड मुरैना में बंद किया था तथा हजारों कांग्रेसियों के साथ ग्वालियर में सिंधिया तथा उनके साथ गए विधायकों का दलबदलू में वापस जाओ का नारा लगाते हुए जम कर विरोध प्रदर्शन किया था। वही कांग्रेश यदि भाजपा के नेताओं को कांग्रेस से टिकट देगी तो उसके दलबदलू वाले मुद्दे की धार कम हो जाएगी। उधर कांग्रेश से बदला चुकाने के लिए मौके की तलाश कर रही बसपा सुप्रीमो को उपचुनाव में अवसर मिल गया। बसपा ने आगामी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले 27 सीटों के लिए उपचुनाव में जहां कांगरे सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों को जीतने में लगाए हुए हैं क्योंकि कमलनाथ के दुश्मन नंबर एक ज्योतिरादित्य सिंधिया की वजह से ही उनकी सरकार गई है इसलिए वह इन सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटें कांग्रेस के लिए जीतकर सिंधिया को उनके ही घर में पटक नहीं देना चाहती है लेकिन कांग्रेस से नाराज बसपा सुप्रीमो ने चंबल संभाग की सभी 16 विधानसभा सीटों में से 8 विधानसभा सीटों में अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करके कांग्रेश पर ऐसी गोली मारी है की कमलनाथ और कांग्रेस नेतृत्व लगभग बोल्ड हो गया है उधर बसपा ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है बसपा ने जोरा सीट से पूर्व विधायक सोने राम कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है वही मुरैना सीट से रामप्रकाश राजोरिया, अंबाह से भानु प्रताप संखवार, नयागांव से योगेश योगेश मेघा मेघा सिंह नरवरिया, गोहद से जसवंत पटवारी, डबरा से संतोष गौड़, कोहरी से कैलाश कुशवाहा, करेरा से राजेंद्र जाटव को टिकट दिया है इसी तरह अगर बसपा ने उपचुनाव में सभी 27 सीटों से अपने प्रत्याशी खड़े कर दिए तो फिर इस उपचुनाव में अनुसूचित जाति का मतदाता कांग्रेश से हटकर बसपा और भाजपा में चले जाने की पूरी संभावना है। जिसका भाजपा प्रत्याशियों को लाभ मिलेगा उनकी जीत आसान हो जाएगी बहरहाल कांग्रेस नेतृत्व बसपा सुप्रीमो कि इस गुगली से अपने को बोल्ड हुआ महसूस कर रहा है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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