माहिल तालाब पर फिर छिड़ी सफाई की जंग

माहिल तालाब में सफाई करते नगर पालिका के कर्मचारी

पाॅलीथिन और गंदगी से आखिर कब मिलेगी निजात
उरई(जालौन)। अब यह भी कम विडंबना की बात नही कि जिस तरह से आये दिन सफाई के नाम पर पालिका प्रशासन मुहिम चलाकर अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर रहा है। उसके सापेक्ष समस्या का हल होता नजर नही आ रहा है। स्थिति यह है कि बीते कुछ अरसे मे ही माहिल तालाब की सफाई को लेकर कई बार कवायद करते सफाई कर्मचारी दिखें पर हालत जस के तस ही रही। बहरहाल बुधवार को भी माहिल तालाब पर नगर पालिका के सफाई कर्मचारी पाॅलीथिन और कचरे को तालाब से निकालते नजर आये।
बताते चले कि नगर में प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों की बात करें तो नगर के ठीक बीचोबीच स्थित माहिल तालाब एक मात्र स्थान है। जो लंबे समय से नगर पालिका और प्रशासन के आर्कषण का केन्द्र बिंदु रहा है। यहां तक कि कुछ वर्ष पहले तो पर्यटन विभाग ने भी इसके सुदंरीकरण की बहुउदेशीय योजनाओं पर लाखो रूपये खर्च किये ताकि इसे बेहतर ढ़ंग से सजाया संवारा जा सके। कई बार तालाब के गंदे पानी को पूरी तरह से निकालकर उसको साफ पानी से भी भरा गया। चारों ओर रेलिंग पौधरोपण तथा पक्के मार्ग के निर्माण के अलावा लोगो को बैठने के लिये पत्थर से निर्मित बैंच आदि का भी प्रबंध किया गया। बहरहाल बड़ी कार्ययोजनाओं के बाद भी माहिल तालाब की मूल समस्या यहां की गंदगी से निजात नही पायी जा सकी है। मौजूदा हालत यह है कि तमाम कोशिशों के बाद भी जिम्मेदार अमलों को अपनी सफाई की मुहिम चलाने के लिये विवश होना पड़ता है। गौरतलब हो माहिल तालाब के चारों ओर उसे बाउंड्री वाॅल से घेर दिया गया है। तालाब के अंदर परिसर में पहुचने के तीन रास्ते है जो निश्चित समय पर ही खोले और बंद किये जाते है। पिछले कुछ अरसे से तो कोरोना के संक्रमण के चलते माहिल तालाब पर लोगो के आने जाने पर ही रोक लगी हुयी थी। ऐसे में बड़ी तादात में कचरा और पाॅलीथिन का जमावडा कैसे हो जाता है यह भी लोगो की समझ में नही आ रहा। बहरहाल जो भी हो पालिका को माहिल तालाब की गंदगी से कब निजात मिल पायेगी कुछ कहा नही जा सकता है।
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