संघ के कार्यवाह ब्रह्मानंद खरे, पूर्व प्राचार्य अरुण श्रीवास्तव

पूर्व प्राचार्य को देने पड़े संघ नगर कार्यवाह के रुपए
नगर कार्यवाहक का था पूर्व प्राचार्य पर 27 लाख का बकाया
एक साजिश के तहत जिला प्रचारक केा फंसाने का किया था षड़यंत्र
जिला प्रचारक ने पूर्व प्राचार्य की कराई थी गंभीर धाराओं में कोतवाली में रिपोर्ट
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

उरई। संघ के प्रभाव का और यंग भारत की खबर का यह असर रहा कि जो पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव वर्षाें से संघ के नगर कार्यवाह ब्रह्मानन्द खरे के 27 लाख रुपए नहीं दे रहे थे। देने को वाध्य होना पड़ा। मालूम हो कि नगर कार्यवाह ब्रह्मा नन्द खरे के पिता स्वर्गीय श्री राम स्वरूप खरे डीवीसी के प्राचार्य रह चुके हैं। साहित्य जगत में उन्हें युग कवि के रूप में जाना जाता है। ब्रह्मानन्द खरे ने बताया कि डीवीसी के सेवा निवृत्त प्राचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव को समय समय पर रुपया उधार दिया था। अभी भी उन पर मेरा (ब्रह्मा नन्द खरे) 27 लाख रुपया बकाया है।
इस बकाया धनराशि को लेकर पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कुछ प्रतिष्ठित लोगों के बीच माह मार्च 2020 तक देने का लिखित वायदा किया था। कुछ रुपया माह अप्रैल 2020 में देने को कहा था। लेकिन जब उन्होंनं 13 जून 2020 तक कोई रुपया वापिस नहीं दिया तब जिला प्रचारक दीपकजी ने नगर कार्यवाह ब्रह्मानन्द खरे का हिसाब करने को कहा। इस पर वे दो अज्ञात व्यक्तियों के साथ संघ कार्यालय आए और बोले कि 27 लाख में तो तुम दोनों का काम तमाम करा दूंगा। अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो दोबारा कभी 27 लाख रुपए के बारे में बात मत करना। समझ लो मैं तुम्हारा रुपया कभी नहीं दूंगा। जाओं अपना रास्ता नापो।
इस दौरान संघ कार्यालय में मौजूद सुमितजी, राम मोहनजी तथा रामजी सेंगर ने समझाने का प्रयास किया किन्तु वे जान से मारने की धमकी देकर वे चले गए। इसके बाद 14 जून को इस मामले कि रिपोर्ट कोतवाली पुलिस में जिला प्रचारक दीपकजी ने पूर्व प्राचार्य अरुण श्रीवास्तव तथा 2 अज्ञात लोगों के खिलाफ की। पुलिस ने आइपीसी की धारा 386 (भय दोहन), 406 (अमानत में खयानत), 406 (जान से मारने की धमकी) का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद मुकदमा दर्ज होते ही पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव फरार हो गए थे।
मालूम हो कि उन्होंने जिले में तमाम लोगों का ब्याज पर पैसा ले रखा है और वे सभी लोग उन्हें खोजते घूम रहे हैं। मामला क्योंकि हाइप्रोफाइल था, संघ के बड़े अधिकारियों का दवाब था। इसके चलते पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव ने शहर के कुछ प्रतिष्ठित लोगों के साथ पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में एक समझौता वार्ता कराई। इसमें सबके सामने डा0 अरुण कुमार श्रीवास्तव ने 5 लाख रुपए माफ करने का अनुरोध किया। ब्रह्मानन्द खरे तथा अन्य सभी प्रतिष्ठित लोगों ने पूर्व प्राचार्य अरुण श्रीवास्तव की इस अनुनय विनय को मान लिया। पूर्व प्राचार्य ने 22 लाख रुपए संघ के नगर कार्यवाह ब्रह्मानन्द खरे को देकर दोनों पक्षों ने आपसी लिखित समझौते पर हस्ताक्षर करवा दिए।
यंग भारत ने इस मामले को सबसे पहले प्रमुखता से उठाया था। जिसमें यह जीत मिली है इस मामले में नगर कार्यवाह ब्रह्मानन्द खरे तथा अन्य सभी प्रतिष्ठित लोगों ने यंग भारत की भूमिका को सराहा।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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