यंग भारत की स्टोरी पर 13 दिन बाद कांग्रेस पार्टी ने लगाई मोहर

यंग भारत की 18 जुलाई, 2020 की स्टोरी थी, कांग्रेस में पीढ़ी की लड़ाई
कांग्रेस मंे खुलकर आगए बुजुर्ग और युवा आमने सामने
यह लड़ाई राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के दो फाड़ तक जा सकती है
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

दिल्ली। यंग भारत ने बीती 18 जुलाई की स्टोरी में यह खुलासा किया था कि कांग्रेस के भीतर पीढ़ी की लड़ाई चल रही है। जिसमें बुजुर्ग पीढ़ी युवा पीढ़ी को संगठन में महत्वपूर्ण पद देने में सहयोग नहीं कर रही है। वह उसके खिलाफ चल रही है। जिसका नतीजा यह हो सकता है कि नई कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस के युवा और उनके साथ आ रहे बुजुर्गाें का साथ लेकर हो सकता है नई कांग्रस बनाने की की पहल करें। जिस प्रकार वर्ष 1969 में कांग्रेस इंडीकेट और सिंडीकेट में बंट गई थी। इसके बाद श्रीमती इन्दिरा गांधी के नेतृत्व में वर्ष 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद स्वतंत्र बांगला देश बनाने के बाद वह बहुत ताकतवर नेता बनकर उभरी थीं। कुछ ऐसी ही स्थिति आज कांग्रेस में फिर आ गई है। जिसका परिणाम कुछ दिन पहले युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में देखने को मिला। जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए। अब राजस्थान के युवा नेता सचिन पायलट विद्रोह का झण्डा उठाए हुए हैं।
बीती 31 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनियां गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस के युवा और बुजुर्ग नेताओं के बीच राज्यसभा के सांसदों की बैठक में तीखीनोंक झोंक हुई। जिसमें एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगाए गए। बुजुर्ग नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। यूपीए 2 सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की युवा नेताओं ने जमकर आलोचना की। बैठक में मौजूद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व रक्षामंत्री एके एंथनी, राज्यसभा में विप़क्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल भी इन आरोपों से असहज हो गए। लेकिन उन्होंने किसी भी पक्ष को बुरा भला न कहकर मौन साध लिया।
जबकि बुजुर्ग नेताओं ने पूर्व मंत्री पी चिदम्बरम, कपिल सिब्बल, आनन्द शर्मा और उनकी लाबी के नेताओं ने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की कार्यषैली पर प्रष्नचिन्ह खड़े किए। जबकि दूसरी ओर युवा नेताओं की लाबी में शामिल राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी बेणुगोपाल, राजीव सातव, पी एल पूनियां, रिपुन बोरा, छाया वर्मा ने खुलकर एक बार फिर राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में हारने के लिए पूछा कि क्या यूपीए सरकार जिम्मेदार थी। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के अन्दर अगर साजिश हो रही थी, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में हुई हार की समीक्षा क्यों नहीं हुई। पिछले 6 वर्षों में यूपीए पर पार्टी संगठन ने कोई आरोप क्यों नहीं लगाया। क्या यूपीए के अन्दर ही साजिश हो रही थी। श्री तिवारी ने कांग्रेस के भीतर भितरघात करने वाले और भेदियों के छुपे होने की बात कहकर यंग भारत की स्टोरी, कांग्रेस में पीढ़ी की लड़ाई की पुष्टि कर दी है। यह भी हो सकता है कि निकट भविष्य में राहुल गांधी के नेतृत्व में नई कांग्रेस का गठन हो और उसकी नीतियों का विरोध करने वाले बुजुर्ग व विरोधी नेता पार्टी से बाहर कर दिए जाएं। जो भी हो लेकिन कांग्रेस एक बार फिर दोफाड़ की ओर बढ़ती नजर आ रही है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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