हाई कोर्ट ने लॉकडाउन की अवधि में शराब की बन्द रही दुकानों की लाइसेंस फीस रिफंड किये जाने के संबंध में सरकार से किया जवाब तलब
याची निधि अग्रहरि(फतेहपुर) की याचिका पर बुधवार को दिया आदेश
वरिष्ठ अधिवक्ता अवनीश मिश्रा एवं अनुराग शर्मा के आर्गुमेंट से सहमत दिखे न्यायाधीश
माननीय न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल एवं माननीय सौमित्र दयाल सिंह की बेंच ने की सुनवाई
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
इलाहाबाद(उच्च न्यायालय): बुधवार 24 जून 2020 को हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने याची निधि अग्रहरि की याचिका पर सुनवाई करते हुए लॉक डाउन की अवधि में पूरे प्रदेश में सभी शराब की दुकाने और मॉडल शॉप के संबंध में सरकार से जवाब मांगते हुए। यह निर्देश दिया कि लॉक डाउन की अवधि में रही बंदी के काल मे शराब की दुकानों की लाइसेंस फीस को रिफंड करने के संबंध में सरकार ने क्या पॉलिसी बनाई है। उसे 16 जुलाई 2020 को कोर्ट में प्रस्तुत करे।
याची निधि अग्रहरि ने अपनी मॉडल शॉप जो फतेहपुर जनपद में स्थित है के संबंध में एक याचिका हाई कोर्ट में दायर करते हुए माननीय न्यायालय से यह मांग की थी कि लॉक डाउन के दौरान उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा शराब की दुकानों को बंद करवा दिया गया था। तो इस अवधि की लाइसेंस फीस उन्हें रिफंड की जानी चाहिए। याची के अनुभवी अधिवक्ताओं द्वारा की गई जोरदार बहस से सहमत होते हुए न्यायालय ने प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल एवं बी.पी सिंह कच्छवाह को कोर्ट में बुलाया और बंदी की अवधि की फीस वापिसी के संबंध में सवाल जवाब किए। सरकारी अधिवक्ताओं के द्वारा तमाम आर्गुमेंट करने के बावजूद कोर्ट ने इस समस्या को पूरे प्रदेश की मानते हुए आदेश पारित किया कि लॉक डाउन में सरकार द्वारा बन्द कराई गयीं शराब की दुकानों के संचालकों को इस पीरियड की लाइसेंस फीस रिफंड करने हेतु सरकार ने क्या पॉलिसी बनाई है। इससे कोर्ट को अगली तारीख 16 जुलाई 2020 को अवगत कराया जाए।
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