रेलवे ने आइआरसीटीसी के 500 सुपरवाइजरों की सेवाओं को रद्द करने का फैसला किया है

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव+बृज मोहन निरंजन
दिल्ली। लाकडाउन का सबसे बड़ा असर रेल सेवाओं पर पड़ा तथा इनको बन्द किया गया। रेलवे सेवा ठप्प होने की बजह से इसका सबसे पहले और सीधा असर उससे जुड़े क्षेत्रों को हुआ है। इन्हीं में से एक है आइआरसीटीसी रेलवे की खानपान और पर्यटन शाखा आइआरसीटीसी ने संविदा पर काम करने वाले 500 से अधिक आतिथ्य पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजरों) की सेवाओं को रद्द करने का फैसला किया है। उसका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इनकी आवष्यकता नहीं रह गई है। रेलवे के सूत्रों के अनुसार आइआरसीटीसी (भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम) ने वर्ष 2018 में लगभग 560 पर्यवेक्षकों को रेल गाड़ियों में ठेकेदारों द्वारा परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए नियुक्त किया था। इन पर्यवेक्षकों का काम रेल गाड़ियों का खानपान के संचालन की निगरानी करना था। इसके तहत उन्हें भोजन की तैयारी की देखरेख, गुणवत्ता की जांच, यात्रियों की शिकायतों का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना था कि खाने के लिए तय कीमत से अधिक धन तो नहीं लिया गया।
आइआरसीटीसी ने बीती 25 जून को एक पत्र के जरिए अपने सभी आंचलिक कार्यालयों को सूचित किया कि वर्तमान परिस्थितियों में इन संविदा कर्मियों की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें एक माह का नोटिस देकर उनके अनुबन्ध समाप्त कर दिए जाएंगे। इस सम्बन्ध में जब यंग भारत ने आइआरसीटीसी के प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि इन पर्यवेक्षकों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। कोरोना वायरस महामारी के कारण लाकडाउन के दौरान आइआरसीटीसी के सेवाएं बहुत अधिक प्रभावित हुई हैं। इस समय रेलवे श्रमिक एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के अलावा 230 विशेष रेलगाड़िया चला रहा है। सभी नियमित यात्री सेवाएं 23 मार्च से निलंबित हैं।