लाखों की कीमत के संसाधन कबाडे़ के हवाले

उरई(जालौन)। यह भी कम विडंबना नही कि आम लोगो की सुविधाओं को देखते हुये सरकारी अमलो दारा खर्च किये जाने वालीे धन की सार्थकता चंद साल भी नही मिल पाती और स्थिति यह बन जाती है कि स्वंय जिम्मेदार अधिकारी उन्हें कबाड के हवाले करने से भी नही चूकतें बहरहाल यहां जिला अस्पताल के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के समीप पडा जनरेटर इसका जीता जागता उदाहरण है जों चंद वर्षो बाद ही अपनी सार्थकता से महरूम कबाडे में तब्दील हो गया है। जिला अस्पताल में मरीजो और उनके तीमारदारों को चोबीस घंटे बिजली की सुविधा मुहैया कराने की मंशा से यहां जिला अस्पताल में लाखो रूपये की कीमत के जनरेटर की व्यवस्था करायी गयी थी विभागीय सूत्रों की माने उक्त जनरेटर बामुशिकल कुछ ही वर्ष तक संचालित रहा उसके बाद उस पर गौर नही किया गया नतीजा यह रहा कि अब वह अपनी सार्थकता खोता जा रहा है। कमोवेश यही स्थिति अन्य कई विभागों में पडे संसाधनों की है जिन पर खासा धन खर्च किया गया लेकिन अब उनका कोई धनीधोरी नही दिखाई देता।
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