लापरवाही: कहीं जिंदगी पर न पड़ जाये भारी

पचास से साठ फीसदी ग्राहको की आमद से माॅल होने लगे गुलजार
लोगो में अब नही दिखलाई देता कोरोना का भय
उरई(जालौन)। आम लोगो को बढ़ते कोरोना संक्रमण से सचेत करने की सारी कवायदें अब मजाक बनकर रह गयी है। हालत यह है कि जिस तरह से बीते कुछ दिनों में बाजारों में आम जिदगी की रफतार तेज हो गयी है। उसको देखते हुये सर्तकता को अब लोग पूरे तरह से भूलकर यह साबित करने मे लगे है कि मानों कोरोना कभी आया ही नही हो। बहरहाल जो भी हो लेकिन खरीदारों की यकायक तेजी ने बाजारों में गर्माहट ला दी है। माॅल में भी पचास से साठ फीसदी ग्राहकों की आमद बतलायी जा रही है तो वहीं दूसरी ओर संक्रमण की आशंका से भी बचा नही जा सकता है।
माॅल मे भीड़ लगाकर खरीददारी करते लोग
अनलाॅक के साथ ही बाजारों की स्थितियां पूरी तरह से बदल गयी है। जिधर देखों उधर भीड़ का सैलाव उमड़ा दिखलाई देने लगा है। जो माॅल कुछ दिनों पहले तक इक्के दुक्के ग्राहको के इंतजार में सारा दिन बिता दिया करते थे। वहां दीवाली के बाद से ही हालात यकायक खासे बदले हुये नजर आ रहे है। माॅल के कर्मचारियों की माने तो पिछले तीन दिनों के दौरान खरीददारों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है। अब स्थिति यह है कि पचास से साठ फीसदी तक लोग खरीददारी के लिये आने लगे है। सिटी लाइफ माॅल के मैनेजर अकबर खान ने बताया कि वह अपनी ओर से हर आने जाने वालों को सोशल डिस्टेंस और मास्क लगाकर आने पर ही अंदर आने की इजाजत देते है। गेट पर सेनेटाइजर की व्यवस्था भी बनाई है। ताकि किसी तरह का संक्रमण का खतरा न रहे और जो लोग बिना मास्क के आते है तो उन्हें बाहर से ही गार्ड वापस लौटा देता है। परंपरागत नगर के बाजारों की हालत बेहद ही चिंताजनक कही जा सकती है। जहां बड़ी तादात मे लोग बिना किसी खौफ के न केवल मुंह खोले वल्कि दुकानों पर इस कदर टूटे पड़ रहे है कि मानों महीनों का राशन उन्हें एक साथ खरीदना हो। फिर चाहे वह कपड़ो की दुकानें हो अथवा अन्य सामानों की। लोगो को इस बीच पूरी तरह से वेपरवाह देखा जा रहा है।
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