लाॅकडाउन के बाद बदले सामाजिक हालात

उरई(जालौन)। वैश्विक महामारी कोविड के संक्रमण से बचाव के लिये दुनिया भर में लगाये गये लाॅकडाउन ने भले ही लोगो के जीवन में उथल-पुथल ला दी हो पर दूसरी ओर इसके प्रभाव सामाजिक सोच को बदलने में बेहद चोकाने वाले दिखे। कुछ ही महीनों की अस्थिरता और अनिश्चिताओं के बीच पनपी चिंताओं ने लोगो को आत्म निर्भरता का ऐसा पाठ पढ़ाया कि वह अब लोगो के जीवन के लिये मजबूत आधार बनता जा रहा है। कुल मिलाकर यह कहा जाये कि लाॅकडाउन ने सामाजिक हालात बदल दिये है तो इस बात में कोई अतिश्योक्ति नही होगी।
मार्च 2020 से पहले की सामाजिक स्थिति पर नजर डालना जरूरी है बताते चले कि कोरोना महामारी के पूर्व सब कुछ कहने को सामान्य था लोग अपनी जिंदगी को एक निर्धारित ढर्रे में जी रहे थे किसी ने स्वप्न में भी नही सोचा होगा कि ऐसा वक्त भी आ सकता है कि जब वह अपने घर की दहलीज से बाहर कदम रखने के लिये भी विवश हो जायेगे हुआ भी यही कुठ ही दिनों के बाद देश भर में बढतें कोरोना संक्रमण से लोगो को बचाने के लिये सरकारों को लाक डाउन का निर्णय लेना पडा वह भी एक के बाद एक कई बार जिसका परिणाम यह रहा कि लोगों के जीवन की रफतार यकायक थम गई और सब कुछ अस्थिरता की भेंट चढ गया लोगो के रोजगार छिन गये बच्चों की पढाई थम गयी यहां तक कि सारी सरकारी व्यवस्थायें भी अस्त व्यस्त होने के कगार पर पहुंच गयी आम आदमी से लेकर खास तक हर किसी के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां उन्हें सोचने के लिये विवश करने लगी। दूरदराज रोजी रोटी के लिये अपने गांव परिवार छोडकर रहने वाले किसी तरह से अपने गांव तो वापिस लौट आये पर जीविका का संकट उनके सामने अब और भी गहरा गया स्कूल बंद हो गये तो शिक्षकों के सामने भी अपने परिवार के भरण पोषण की चिंताओं ने उन्हें अंधेरे में ला दिया सरकारी व्यवस्थाओं से जुडे लोगो को कुछ उम्मींद भी रही पर निजी संस्थाओं से जुडे लोगो के सामने तो अंधेरा ही अंधेरा दिखने लगा कमोवेश यह हालात दिहाडी मजदूरों से लेकर छोटे बडे व्यवसाई नौकरपेशा यहां तक कि सडकों पर भीख मांगकर अपना गुजारा बसर करने वालों के सामने भी कम चुनौतिया नही रही। सडके सूनसान और वीरानगी की चादर ओडे सोती नजर आती थी तो वही घरों में बंद लोगों में साफ तौर पर बैचेनी दिखने लगी थी कि ऐसे हालात यदि लंबे समय तक रहे तो कैसे वह अपने और परिवार के जीवन का निर्वाह कर सकेगे। बहरहाल अनिश्चिताओं के बीच जी रहे लोगो की जिंदगी को पटरी पर लाने में सकारात्मक सोच ने जो भूमिका निभाई उसके परिणाम यह रहे कि ज्यादातर लोग जीवन की वास्तविकता को बेहतर ढंग से समझ सके और उन्होने जीवन शैली को बदलने में ही अपनी और अपने परिवार तथा पूरें समाज की भलाई समझी लाक डाउन के बाद अब मौजूदा सामाजिक हालात देखे तो बहुत कुछ बदला हुआ सामने आता है लोगो की सोच और जिंदगी के प्रति नजरिया काफी बदल गया है सबसे अच्छी बात यह है कि लोगो में आत्म निर्भरता की सोच कायम हुयी है जो उनके जीवन की दिशा और दशा बदलनें काफी कारगर साबित होगी । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हालातों की नब्ज को बेहतर ढंग से जाना और लोगो को आत्म निर्भर भारत बनाने की दिशा में आगे आने को कहा उनका मंत्र लोकल से वोकल बनने का मतलब भी साफ है कि लोग दिखावा और झूठी जिंदगी से बाहर निकलकर सच को अ्रगीकार करें और उसी के अनुरूप जीवन की व्यवस्थायें तैयार कर आगे आये।
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