लेखिका ने अपनी किताब थैंक्यू लॉकडाउन कोरोना योद्धाओं को समर्पित की; 12 दिन में मोबाइल पर टाइप कर किया फाइनल

पीएम मोदी के लोकल को वोकल और आपदा में अवसर की बातों से प्रेरित लिखी गई किताब

बतौर मुख्य अतिथि पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा- यह समाज के लिए बहुत ही सुंदर देन

नेशनल पीजी कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर नेहा श्रीवास्तव की किताब ‘थैंक यू लॉकडाउन’ का बुधवार को ऑनलाइन विमोचन हुआ। नेहा ने बताया कि, इसी साल 30 अप्रैल को पिता सरकारी नौकरी से रिटायर हुए। लॉकडाउन होने के कारण मैं घर पर ही थी। लेकिन चाहकर भी पिता का हाथ नहीं पकड़ सकती थी। उन्होंने मुझे पढ़ा लिखाकर एक मुकाम दिलाया। इसी भावुकता के पलों ने मुझे कुछ करने की प्रेरणा मिली जो एक किताब की शक्ल में सामने है। उन्होंने अपनी किताब कोरोना योद्धाओं को समर्पित की है।

विमोचन में बतौर मुख्य अतिथि पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि यह पुस्तक समाज के लिए बहुत ही सुंदर देन है। कोरोना ने अपनों को समझने की दृष्टि दी है। किताब को पढ़ने के बाद हर कोई इससे जुड़ जाएगा। इसमें अपने को खोज पाएगा।

लैपटॉप खराब था इसलिए मोबाइल पर की टाइपिंग

मनोवैज्ञानिक विषय की प्रोफेसर नेहा ने लॉकडाउन में कई लोगों की काउंसलिंग की। इस दौरान उन्होंने लोगों की बात और समस्या के बीच कोरोना महामारी को आपदा को अवसर में बदलने का सोचा। होली में नेहा का लैपटाप खराब हो गया था। इसके बाद लॉकडाउन के चलते सभी दुकानें बंद होने से न तो लैपटॉप रिपेयर कराया जा सकता था और न ही नया खरीदा जा सकता था। इसके बाद नेहा ने मोबाइल पर ही कंटेंट लिखने का निर्णय लिया। एक मई से 12 मई तक 22 मार्च से 12 मई तक के समय की पॉजिटिव बातों को ही इस किताब में संजोया गया है। लॉकडाउन के समय जो अच्छा कार्य हुआ है, उसे लिपिबद्ध किया गया है।

सोशल मीडिया से हैदराबाद में छपी किताब

किताब लिखने के दौरान ही नेहा की सोशल मीडिया के जरिए हैदराबाद के गुरुकुल पब्लि‍शिंग के संचालक से संपर्क हुआ और वे किताब छापने को राजी हुए। 15 मई तक नेहा ने सभी प्रकार के करेक्शन लगाकर प्रकाशक को किताब की सामग्री सौंप दी। इसके बाद 118 पेजों की “थैंक यू लॉकडाउन : एक सकारात्मक चश्मे से” के शीर्षक वाली नेहा की किताब सामने आई। डॉ. नेहा लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए (गोल्ड मेडलिस्ट) हैं। इन्हें “बेस्ट वुमन ऑफ लखनऊ यूनिवर्सिटी : चांसलर मेडल” से गवर्नर द्वारा नवाजा जा चुका है। इसके अलावा लखनऊ विश्वविद्यालय में सबसे अच्छे व्यवहार और सहयोग के लिए “डॉ. चक्रवर्ती गोल्ड मेडल” से भी इन्हें नवाजा जा चुका है। वर्ष 2015 में नेहा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से दिव्यांगों से जुड़े विषय पर अपनी पीएचडी पूरी की है। फि‍लहाल नेहा कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते खतरे के बीच लोगों में सकारात्मक संदेश देने में जुटी हैं।

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