विकास दुबे के गांव में नहीं मना आजादी का जश्न, न फहराया गया तिरंगा

कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी और एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के चौबेपुर स्थित बिकरू गांव में आजादी का जश्न नहीं मनाया गया। यह पहला मौका है जब यहां स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी सरकारी भवन में ध्वजारोहण नहीं किया गया। गांव के पंचायत भवन का ताला भी नहीं खोला गया। गांव के लोगों ने बताया कि हर साल पंचायत भवन में तिरंगा फहराया जाता था। ग्राम सचिव 15 अगस्त को भी गांव नहीं पहुंचे। गांव के प्राथमिक विद्यायल में सुबह शिक्षक तो पहुंचे, पर तिरंगा नहीं फहराया। कुछ देर रूकने के बाद सभी शिक्षक चले गए।

डा. महेंद्र कुमार, सीडीओ कानपुर का कहना है कि गांव में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी बीडीओ और ग्राम सचिव की होती है। बीडीओ आलोक पांडेय कोरोना संक्रमित होने के कारण क्वारंटीन हैं। उनकी अनुपस्थिति में ग्राम सचिव की जिम्मेदारी थी कि वह गांव जाकर लोगों को एकजुटकर ध्वजारोहण कराते और गांव में सफाई का संदेश भी देते। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो यह अपराध है। इस प्रकरण की जांच कराएंगे। वहीं बीडीओ आलोक पांडेय ने कहा कि गांव में ध्वजारोहण न होना अपराध है। यह जिम्मेदारी ग्राम सचिव के साथ-साथ ग्राम प्रधान की भी होती है। वह गांव जाकर लोगों को एकजुटकर ध्वजारोहण कराएं। ग्राम सचिव के पास कई गांवों की जिम्मेदारी होती है। यह पता लगाया जा रहा है कि वह किन कारणों से बिकरू गांव नहीं पहुंच पाए। यह कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी।

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