विकास प्राधिकरण का दर्जा, फिर भी बदहाल नगर की हालत

कागजी घोडे तो दौडे पर मंजिल जस की तस

उरई(जालौन)। देश के औधौगिक महानगर कानुपर और ऐतिहासिक नगरी झांसी के ठीक बीचों बीच स्थित विकास प्राधिकरण का दर्जा प्राप्त उरई को भले ही पिछले दो दशक के दौरान विकास को लेकर शासन और प्रशासन से एक के बाद एक कई बडी कार्य योजनाओं से सवारनें की मुहिम से जोडा गया हो लेकिन सच्चाई यह है कि नगर के लोगो को जमीनी हकीकत में अब तक समस्याओं से निजात नही मिल सकी है ।
बुदेल खंड के नक्शें में देखा जाये तो उरई नगर के कई मामलों में अन्य जनपदों की तुलना में विकास की बेहतर संभावनाओं का नगर माना जाता है चूकि भौगोलिक रूप से नगर की स्थिति देश के एक बडे औधोगिक महानगर कानपुर और ऐतिहासिक नगरी झांसी के ठीक बीचोंबीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर है लिहाजा नगर के लिये विकास के कई मार्ग स्वत ही खुल जाते है बतौर उदाहरण प्रदेश सरकार की मेडीकल कालेज निर्माण की एक बडी योजना के पीछे यह भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा लेकिन इस सबके बाबजूद विडंबना यह है कि आंतरिक तौर पर नगर समस्याओं का गढ बना हुआ है वह भी समस्यायें ऐसी जिनके निराकरण के लिये स्थानीय निकाय से लेकर प्रशासन और अन्य विभागीय अमलों ने भी कई कार्ययोजनायें बनाई यहां तक की उन कार्य योजनाओं पर खुले हाथों धन भी जमकर खर्च किया किन्तु समस्याओं के मकडजाल में नगर जस के तस फंसा रहा फिर चाहे वह अतिक्रमण से मुख्य बाजार में लगने वाले जाम की समस्या हो या फिर गंदगी और जल भराव की कुछ स्थान तो अभी भी उसी हाल में है। लोग अभी भी उनसे जूझ रहे है यह दीगर बात है कि बीच बीच में प्रशासनिक आला अधिकारियों ने इनके निराकरण के लिये कार्य योजनाओं को अमली जामा पहनाना चाहा कित्ु दुर्भाग्यवश उनके तबादले हो जाने से बाद में उक्त कार्य योजनायें ठंडे बस्तें में चली गयी। नतीजतन नगर के लोगो ने भी मान लिया कि समस्याओं से जूझना ही उनकी नियति है बहरहाल जो भी हो लेकिन इतना साफ है कि विकास प्राधिकरण के दर्जा प्राप्त होने के वर्षो बाद भी शहर में व्याप्त समस्यायें नगर वासियों के लिये नासूर बनी हुयी है।
चरम सीमा पर दिखती वाहनों की अराजकता
सडकों पर आये दिन लगने वाले जाम से निजात के लिये अब तक किये गये प्रयास भी खोकले साबित हो रहे है चैराहो पर तीसरी आंख यानि सर्विलांश सीसी कैमरें भले ही लगा दिये गये हो लेकिन वाहन चालकों की अराजकता पर पूरी तरह से लगाम नही लगाई जा सकी है यही वजह है कि मुख्य मार्ग स्थित बाजार के घंटाघर चैराहें माहिल तालाब स्टेट बैंक इलाहाबाद बैंक तिराहा अडडा मंदिर चैराहें और मौनी मंदिर तिराहें पर हर दिन जाम की समस्या से जूझते लोग नजर आते है कमोवेश शहीद भगत सिंह चैराहे से काली माता मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते की हालत भी जाम की समस्या से अछुती नही है यहां सडक के दोनो ओर बैठे सब्जी विके्रताओं की दुकानों के चलते रास्ते पूरी तरह से घिर जाते है जिससे सडक से गुजरने वाले वाहन जाम में फसें रहते है इस रास्ते पर आये दिन वाहन चालक और पैदल चलने वाले राहगीर दुर्घटनाओं का शिकार भी हो रहे है।

खोखले साबित हुये अतिक्रमण हटाओं अभियान
नगर के मुख्य राजर्माग का सर्वाधिक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर दिशा में कालपी बस स्टैण्ड से लेकर झांसी पुल तक लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी के दरम्यान कई जगह सडक अतिक्रमण का शिकार यही नहीं अन्य सडके भी इससे अछूती नही है यह दीगर बात है कि नगर को इस गंभीर समस्या से निजात के लिये बीते एक दशक के दौरान ही जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन ने संयुक्त रूप से एक दो बार नही बल्कि दर्जन भर से अधिक बार अतिक्रमण हटाओं अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारियों का फर्ज निभाया किन्तु उनके नतीजें देखे जाये तो वह कम हास्यास्पद नही रहें। फिलहाल मौजूदा स्थिति यह है कि कई मुख्य मार्ग और अनैको गलियों में अतिक्रमण का बोल बाला है नगर के सुनियोजित विकास को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2006 में जो महायोजना तैयार की थी उसे माजूदा हालातों के अनुकूल नही माना गया लिहाजा नई महायोजना को तैयार कर शासन को भेजा गया है जिसके स्वीक्रत जल्द होने की उम्मींद की जा सकती है उन्होने साफ तौर पर कहा कि नगर के सुनियोजित विकास के लिये प्रशासन हर संभव प्रयास करेगा जरूरत पडी तो सख्ती भी बरती जायेगी ।

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