श्रमदान के काम को मनरेगा का दिखाकर सीएम से श्रेय लेने की मची होड़

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रवासी मजदूरों को भागीरथ सम्मान देने की घोषणा से पहले इन्हें कोई पूंछ भी नही रहा था
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
लखनऊ+भांवरपुर: बांदा जिले की नरैनी तहसील के ग्राम पंचायत बिल्हरका का छोटा सा गांव है भांवरपुर। जहां सुखी घरार नदी को पुनर्जीवित करने के लिए काम चल रहा था। और अब भी जल से भरी हुई इस घरार नदी पर श्रमदान का काम चल रहा है। नदी के तट पर मेला जैसा दृश्य है।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को केंद्रीय जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से जैसे ही यह सूचना और फोटाग्राफ मिले कि उत्तरप्रदेश के बांदा जनपद के ग्राम भांवरपुर में बीते एक दशक से सूखी पड़ी घरार नदी को प्रवासी मजदूरों ने श्रमदान करके पुनर्जीवित कर लिया है। अब घरार नदी मे 4 से 5 फुट पानी भरा हुआ है। नदी के तट पर मेला जैसा माहौल है। और प्रवासी मजदूरों के साथ आधा दर्जन गांव के ग्रामीण प्रतिदिन श्रमदान कर रहे हैं। नदी के किनारे ग्रामीण कीर्तनमंडलियां कीर्तन गा रही हैं, नाच रही हैं। ग्रामीण महिलायें श्रमदानियों के लिए लोकगीत गाते हुए सामुहिक रसोई बना रही हैं। श्रमदानियों के साथ सह भोज हो रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अवर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी के साथ मंत्रणा की और इन श्रमदानी प्रवासी मजदूरों को भागीरथ का नाम देकर उनका सम्मान करने की घोषणा की। बांदा का जिला प्रशासन जो बीती 8 जून से यहां झांकने तक नहीं आया था। मुख्यमंत्री की घोषणा के साथ ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। दो दिन पहले खंड विकास अधिकारी(BDO) मनोज कुमार अपने अमले के साथ घरार नदी के तट पर पहुंचे और कहा इस कार्य को हम मनरेगा से जोड़ देंगे। और तुम सभी श्रमदानियों को 201 रुपए प्रतिदिन मनरेगा मजदूरी के हिसाब से तुम लोगों का पिछला भुगतान भी करा देंगे। इस पर मजदूर बोले साहब घरार नदी को पुनर्जीवित करने का काम हम लोगन ने श्रमदान से कीन्ह है। साहब हमे बेईमानी का पैसा न चाही। हम गरीब जरूर हन पै बेईमान निहाय। ये जवाब सुनकर BDO हक्का बक्का रह गए पर उन्होंने अफसरी के रौब में बांदा से बनवाकर लाये एक मनरेगा बोर्ड नदी के तट पर जबरिया लगवा दिया। और गजब बात ये है कि BDO साहब ने मनरेगा के कार्य का जो बोर्ड लगवाया है उसमें घरार नदी को नाला बना दिया है। इस बोर्ड मे लिखा है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम। उसके नीचे वर्ष 2020-21 विकास खंड नरैनी जनपद बांदा लिखा है। इस बोर्ड में कार्य का नाम- शोभालाल पटेल के खेत से माइनर के पुल तक नाला सफाई कार्य। अनुमानित लागत- 78,473 रुपए लिखा है। कार्य प्रारंभ करने की तिथि और समाप्त करने की तिथि नहीं लिखी है। कार्यदायी संस्था- ग्रामपंचायत बिल्हरका, बोर्ड में ग्राम प्रधान का नाम रामनरेश सिंह, सचिव का नाम विनय सिंह, रोजगार सेवक का नाम बबलू और टीए का नाम शिव शरण लिखा हुआ है। अभी यह काम पूरा करके प्रशासन के अधिकारी अभी चैन से भी नहीं बैठे थे कि मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर लखनऊ की टीम जांच के लिए भांवरपुर कल 20 जून को पहुंच गई। जहां उन्होंने मजदूरों द्वारा घरार नदी पर किये जा रहे श्रमदान का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी पर लगे नाले के बोर्ड को भी देखा। जब उन्होंने इस बारे में श्रमदान कर रहे मजदूरों से पूंछा तो मजदूर बोले कि साहब हमाये पुर्खों के जमाने से यह घरार नदी बहत रही है। पिछले दस साल से जबसे ये नदी सुख गई और मजदूर रोजी रोटी के लिए पलायन कर देश के तमाम महानगरों में जाने लगे। तबसे यह बांदा जिला के अधिकारी या नदी का नाला कहयेलाग। इस पर लखनऊ से आई जांच टीम के ग्राम विकास विभाग के मुख्य अभियंता ने CDO हरिश्चंद्र वर्मा को निर्देश दिए कि एस्टीमेट तैयार कर इसे नाले का नहीं बल्कि घरार नदी का स्वरूप दिया जाए। यहां पर CDO श्री वर्मा ने जांच टीम को बताया कि नाला सफाई में लगे मजदूरों को मनरेगा से प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है। इस पर आक्रोशित मजदूरों ने कहा कि साहब हमने श्रमदान करके अपनी यह नदी पुनर्जीवित कीन्ह है। हम एकौ पैसा नहीं पाओ आय। इस पर जांच टीम के सामने जिले के अधिकारी सकपका गए। वहां कई ग्रामीण यह भी कहते सुने गए कि यदि जांच हो जाये तो ये भी पता चल जाएगा कि इस सुखी घरार नदी मे पिछले कितने वर्षों से कागजों में मनरेगा का काम दिखाया जा रहा है। और लाखों का बजट कबसे खाया पचाया जा रहा है। बहराल मुख्यमंत्री की घोषणा और जांच टीम के आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126