श्रीलंका में संसदीय चुनाव में महिन्दा राजपक्षे की पार्टी को मिला दो तिहाई बहुमत

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

दिल्ली। श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटव्या राजपक्षे की पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी को दो तिहाई बहुमत प्राप्त हुआ है। उनके भाई महिन्द्रा राजपक्षे को एकबार फिर प्रधानमंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। जिन्होंने पिछले नवंबर माह में कार्यवाहक की भूमिका निभाई थी। राजपक्षे परिवार के श्रीलंका पीपुल्स फ्रंट (एसएलपीपी) ने श्रीलंका के आम चुनाव में दोतिहाई बहुमत से जीत हासिल की है। इस पार्टी को प्रस्तावित ‘‘संवैधानिक परिवर्तनों‘‘ को पूरा करने के लिए इतनी बड़ी जीत की जरूरत भी थी।
पार्टी ने कुल 225 सीटों में से 145 सीटें जीती हैं साथ ही 5 सीटें एसएलपीपी के सहयोगी दलों ने जीती हैं। मालूम हो कि श्रीलंका में एसएलपीपी ने 9 माह पहले राष्ट्रपति चुनाव भी जीता था। इसके बाद गोटव्या राजपक्षे ने 18 नवम्बर, 2019 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। श्रीलंका में बीते बुधवार का मतदान हुआ था। गुरूवार का वोटों की गिनती हुई और आज सुबह का अधिकारिक तौर पर नतीजों का ऐलान किया गया। नतीजे घोषित होने के कुछ वक्त पहले महिन्द्रा राजपक्षे ने ट्विट करके यह सूचना दी कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन पर जीत का शुभकामना संदेष दिया है।
महिन्दा राजपक्षे ने लिखा कि लोगों के अभूतपूर्व समर्थन के साथ भारत व श्रीलंका के संबंधों को और बेहतर बनाने का काम करेंगे। उन्होंने लिखा है कि श्रीलंका और भारत अच्छे मित्र देश हैं। बीते दो दषकों से श्रीलंका की राजनीति में राजपक्षे परिवार को दबदबा रहा है। महिन्दा राजपक्षे इससे पहले 2005 से 2015 तक श्रीलंका के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नतीजों के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा के बेटे के नेतृत्व में बना एक नया समूह अब श्रीलंका में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभर कर आया है। रणसिंघे की 1993 में हत्या कर दी गई थी।
श्रीलंका में कोरोना महामारी के बीच में चुनाव हुआ। हालांकि महामारी के कारण दो बार मतदान की तारीखें स्थिगित की जा चुकीं थीं। राजपक्षे परिवार की जीत पर जानकारों का कहना है कि श्रीलंका के चुनाव में यह बड़ी जीत है। राष्ट्रपति चुनाव जीतने के सिर्फ नौ महिने में गोटव्या राजपक्षे ने अपने गठबंधन का बड़ी जीत दिलाई है। राजपक्षे अपनी विषेष नीति के चलते श्रीलंका की सिंहली जनता के बीच लोकप्रिय हैं। श्रीलंका का चैथाई हिस्सा सिंहली है। जो राजपक्षे को 2009़ में अलगाववादी संगठन तमिल टाइगर्स का अंत करने का श्रेय देते हैं। तब राजपक्षे श्रीलंका के रक्षा सचिव हुआ करते थे। श्रीलंका में मतदाताओं का एक बड़ा तबका है जो यह मानता है कि उनक सत्ता में होने से श्रीलंका की सरकार को स्थिरता मिलती है। राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते हुए श्रीलंका में कोरोना महामारी के खिलाफ भी मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने में अच्छा कार्य किया गया है।

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