35 वर्ष पुरानी राजस्थान पुलिस की खूनी कहानी के प्रत्येक पहलू पर यंग भारत की विस्तृत रिपोर्ट

फ़ाइल फ़ोटो-राजा मानसिंह

7 बार के विधायक लोकप्रिय नेता राजा मान सिंह की मुठभेड़ दिखाकर की गई थी हत्या
राजस्थान के कुख्यात पुलिस अधिकारी कान सिंह भाटी ने रची थी विधायक की हत्या की साजिश
घटना के बाद सीएम को देना पड़ा था स्तीफा
हत्या के 35 साल बाद आया फैसला, 1700 तारीखें पड़ी, बदले गए 25 जज
सीएम के हेलीकॉप्टर को जीप से मारी थी टक्कर

मथुरा: 35 साल के लंबे इंतजार के बाद राजा मान सिंह हत्या मामले में आखिरकार बुधवार को इंसाफ हुआ। 11 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह एक ऐसा मामला था, जिसने राजस्थान की राजनीति में एक तरह से भूचाल ला दिया था। मौजूदा विधायक के एनकाउंटर का भी संभवत: यह पहला ही मामला था। आखिर कौन थे राजा मानसिंह? क्यों क्षेत्र में उनकी पकड़ थी? क्या हुआ था उस दिन? आइए जानते हैं ऐसे सवालों के जवाब…

अंग्रेजों की नौकरी नहीं आई पसंद
भरतपुर रियासत के राजा मान सिंह का जन्म 1921 में हुआ था। राजा मान सिंह बहुत ही स्वाभिमानी व्यक्ति थे। कहा जाता है कि उन्हें आम जनता के बीच रहना ज्यादा पसंद था। ब्रिटेन से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।
फिर अंग्रेजी शासन में सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट भी हो गए। उस समय भरतपुर में लोग देश के साथ रियासत का भी झंडा लगाते थे। बस इसी बात पर अंग्रेजों से ठन गई। नौकरी छोड़ी और राजनीति में आ गए। 

आजादी के बाद राजनीति में कदम 
देश आजाद होने के बाद राजा मान सिंह ने भी राजनीति में कदम रखे। मगर कांग्रेस का साथ उन्हें मंजूर नहीं था। इसलिए निर्दलीय ही चुनाव लड़े।  डीग विधानसभा सीट से 1952 से 1984 तक सात बार निर्दलीय विधायक चुने गए। कांग्रेस से इस बात पर समझौता था कि उनके खिलाफ उम्मीदवार भले ही उतारें, लेकिन कोई बड़ा नेता प्रचार के लिए नहीं आएगा। 1977 में जेपी लहर और 1980 की इंदिरा लहर में भी वह चुनाव जीते। 

सीएम ने डीग सीट को बनाया नाक का सवाल

फ़ाइल फोटो- राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर
फ़ाइल फोटो- राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव थे। उस समय राज्य के मुख्यमंत्री थे शिवचरण माथुर। कहा जाता है कि उन्होंने डीग सीट को नाक का सवाल बना लिया। डीग से कांग्रेस उम्मीदवार थे सेवानिवृत्त आईएएस ब्रिजेंद्र सिंह। 20 फरवरी को वह कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने के लिए डीग पहुंच गए। यह कांग्रेस के किसी बड़े नेता को प्रचार के लिए न भेजने के समझौते के खिलाफ था। माथुर के इस कदम से स्थानीय कांग्रेसी नेता भी खुश हो गए और उन्होंने राजा मान सिंह के पोस्टर फाड़ दिए। 

नागवार गुजरी बात, सीएम के हेलीकॉप्टर को मारी टक्कर 
राजा मान सिंह को कांग्रेस की ओर से मिला यह धोखा नागवार गुजरा। सीएम की रैली से पहले ही उन्होंने मंच को तुड़वा डाला। इसके बाद वह जीप (जोंगा) लेकर उस हेलीपैड की ओर बढ़े, जहां सीएम का हेलीकॉप्टर आना था। गुस्से से लाल राजा मान सिंह ने वहां खड़े हेलीकॉप्टर को कई बार टक्कर मारी। मजबूरी में मुख्यमंत्री माथुर को सड़क से जयपुर रवाना होना पड़ा। उपद्रव की आशंका के चलते कर्फ्यू लगाना पड़ा। डीग थाने में पायलट व आरएसी जवान विशंभरदयाल सैनी की ओर से आईपीसी की धारा 147,149, 307 427 के तहत एफआईआर कराई गई थी। 

पुलिस ने घेरकर की हत्या, गंवानी पड़ी थी सीएम को कुर्सी

राजा मान सिंह हत्याकांड के दोषी कान सिंह भाटी डिप्टी एसपी को ले जाती पुलिस
राजा मान सिंह हत्याकांड के दोषी कान सिंह भाटी डिप्टी एसपी को ले जाती पुलिस

ऐसा करके उन्होंने सीधे सरकार को ललकारा था। 21 फरवरी को वह घर से बाहर निकलने लगे, तो लोगों ने मना किया कि कर्फ्यू है, मत जाइए। उन्होंने कहा कि अपनी रियासत में कैसा डर। हालांकि राजा मान सिंह के परिजनों का कहना है कि वह आत्मसमर्पण करने जा रहे थे। 21 फरवरी को पुलिस ने अनाज मंडी में राजा मानसिंह को हाथ से इशारा करके रुकने को कहा। जब राजा मानसिंह जोंगा बैक करने लगे तभी फायरिंग हुई। इसमें राजा मानसिंह उनके साथी सुमेरसिंह और हरिसिंह की गोली लगने से मौत हो गई। राजा के दामाद विजयसिंह की ओर से 18 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया गया था।

पूरे भरतपुर में विरोध प्रदर्शन 
इस घटना के बाद पूरा भरतपुर जल उठा। दो दिन बाद ही मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। जांच सीबीआई को सौंपी गई। बाद में 1990 में उनकी बेटी दीपा भरतपुर से सांसद चुनी गईं।

तारीख पर तारीख: 1700 तारीखें, 25 जिला जज बदले गए

इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई के दौरान 1700 तारीखें पड़ीं और 25 जिला जज बदल गए। वर्ष 1990 में यह केस मथुरा जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया गया था। कुल 78 गवाह पेश हुए, जिनमें से 61 गवाह वादी पक्ष ने तो 17 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए। 8 बार फाइनल बहस हो चुकी थी। इस सुनवाई के दौरान करीब 35 साल में लगभग 1000 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए गए।

11 पुलिसकर्मी दोषी करार, 3 की हो चुकी है मौत

मथुरा जिला कोर्ट ने 35 साल पुराने बहुचर्चित राजा मानसिंह हत्याकांड में मंगलवार काे पूर्व डीएसपी कानसिंह भाटी समेत 11 पुलिसवालों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने तीन आरोपी को बरी कर दिया। हत्या के 3 आरोपियों नेकीराम, सीताराम और कुलदीप की मौत हो चुकी है। आरोपी महेंद्र सिंह पहले ही पहले ही रिहा किया जा चुका है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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